नई दिल्ली। लड़कियों या महिलाओं के लिए उपयोग होने वाला ‘वर्जिनिटी’ शब्द एसा शब्द है, जो सदियों से विवादस्पद रहा है। विवादस्पद हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ‘वर्जिनिटी’ को महिलाओं या लड़कियों की पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। आपको पहले हम ये बता दें कि वर्जिनिटी का मतलब हाइमन या पतली सी झिल्ली होती है। इसे लड़की की इज्ज़त से, उसके चरित्र से जोड़कर देखा जाता है। अगर शादी के बाद महिला को संबंध बनाने के बाद हाइमन या पतली सी झिल्ली फटने के बाद खून आये तो मतलब वो पवित्र है यानि शादी से पहले उसने किसी के संबंध नहीं बनाया है। अगर खून न निकले तो वह अपवित्र है, मतलब तो आप सब समझ ही गये होंगे।

अब आप ये समझ रहे होंगे कि हम इसकी बात क्यों कर रहे हैं तो इसका संबंध या मकसद दिल्ली एनसीआर के एक क्लिनिक एड से है। क्लिनिक ने ‘हाइमनोप्लास्टी’ का ऐड दिया गया है। यानी आपकी फटी हुई झिल्ली को वापस जोड़ने की सर्जरी। इसमें ये भी लिखा हुआ है, अपनी अरेंज्ड मैरिज को अफेक्ट करने का मौका अपने पास्ट को न दें। यानी कि अगर आपने पहले ‘सेक्स’ कर लिया है, और आप नहीं चाहतीं कि किसी को पता चले कि आप कथित रूप से ‘कुंवारी’ नहीं हैं, तो चुपचाप आकर ये सर्जरी करा लें। इस तरह के एड के बाद तहलका मच गया है।

सबसे पहले समझें, हाइमन क्या होता है

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि एक झिल्ली वजाइना की ओपनिंग को ढक कर रखती है। जब पीनस अंदर जाता है तो ये झिल्ली फट जाती है। मगर ये पूरी तरह सच नहीं है। आप ख़ुद सोचिए, अगर ऐसा होता तो क्या कुंवारी लड़कियां पीरियड के दौरान ब्लीड कर पातीं? आपने कभी डोनट देखा है? एक विदेशी मिठाई होती है गोल आकार की, बीच में छेद होता हैष यानी टायर जैसा छल्ला।

हाइमन एक टिश्यू होता है उसी आकार का ये वजाइना के अंदर होता ज़रूर है, पर डोनट की तरह, इस में भी एक छोटा सा छेद होता है। उसी की बदौलत पीरियड में खून वजाइना के बाहर आ पता है। हाइमन को एक प्लास्टिक की थेली समझिए। ये इलास्टिक की तरह खीचीं जा सकती हैं। फट सकती है, पर टूट नहीं सकती. ठीक वैसे ही हाइमन होता है। अगर आपको लगता है कि हाइमन पहली बार सेक्स करते ही गायब हो जाता है, तो आप गलत हैं। ये कहीं जादू से गायब नहीं होता। ये वहीं रहता है। बस वक़्त के साथ-साथ पतला होता जाता है।

 जब लड़की पैदा होती है, तब उसका टिश्यूनुमा हाइमन काफ़ी मोटा होता है। पर जैसे-जैसे वो बड़ी होती है, हाइमन पतला होता जाता है। कई सारी वजहों के चलते जैसे: चलना, दौड़ना, खेल-कूद, और हस्तमैथुन। इन सारी वजाहों से हाइमन पतला होता जाता है और धीरे-धीरे ख़त्म हो जाता है। यही नहीं, उसकी जो ओपनिंग होती है, वो और चौड़ी होती जाती है. जब तक लड़की का शरीर सेक्स के लिए तैयार होता है, तब तक हाइमन काफ़ी पतला हो चुका होता है। पहली बार सेक्स के दौरान खून आए ही, ऐसा कोई नियम नहीं होता।

हाइमनोप्लास्टी में क्या होता है?

दो तीन तरीके हैं इस सर्जरी के.

  1. एक तो बचा हुआ हाइमन इस्तेमाल किया जाता है, उसे वापस स्टिच लगाकर सिल दिया जाता है।
  2. दूसरे इसमें जेलेटिन की कैप्सूल्स इस्तेमाल की जाती हैं जिनमें लाल रंग भरा होता है और इंटरकोर्स के दौरान वो फट जाती हैं. ताकि पतिदेव को लगे कि पत्नी ब्लीड कर रही है और सबकुछ सही है।
  3. तीसरा, वजाइना के फ्लैप्स का इस्तेमाल करके हाइमन ठीक किया जाता है. इसे ठीक होने में समय लगता है. इसमें कम से कम तीन महीनों तक शारीरिक सम्बन्ध बनाने से बचने की सलाह दी जाती है।

इसमें दिक्कत क्या है?

साराह पैटर्सन ब्राउन अपने आर्टिकल एजुकेशन अबाउट द हाइमन इज नीडेड में लिखती हैं,

‘मैंने अपनी 41 महिला कलीग्स से इस बारे में पूछा- 14 (34 फीसद) को अपने पहले शारीरिक सम्बन्ध के दौरान ब्लीडिंग हुई, 26 (63 फीसद) को बिलकुल नहीं हुई, और एक को याद नहीं था इस बारे में।

फिर भी हाइमन को लेकर क्रेज बना दिया गया है। और ये कोई नई बात नहीं है।1865 में ज्यूइश-ऑस्ट्रियन फिजिशियन जेकब पोलैक ईरान के राजसी दरबार में काम करते थे। उन्होंने बताया कि कुछ दूल्हे हाइमन को लेकर दुल्हन के परिवार को ब्लैकमेल करते थे और उनसे मोटा दहेज़ मांगते थे। जिन परिवारों के पास साधन होते थे, वो पहले से ही तैयार कर लेते थे। वो लड़की को शादी से पहले ही बच्चा पैदा करने वाली दाई के पास ले जाते थे। वो बता देती थी कि लड़की वर्जिन है या नहीं। अगर वो वर्जिन नहीं होती थी, किसी भी कारण से, तो उसका हाइमन वापस सिलवा दिया जाता था, यानी ये घटिया प्रथा नई नहीं है।