By पुष्पेन्द्र वैद्य

क्षिप्रा नदी के किनारे बने श्मशान के पास एक कुटिया में अघोरी तांत्रिक सुखाराम…..काला लिबास…घनी काली दाढी…..गले में नरमुंड की माला….लाल आंखे…..कुटिया में शराब की बोतले….अजीब सी गंध……हवनकुंड…खोपडीनुमा हडि्डयां…..सुखाराम चिलम में गांजा भरकर नशे में डूबा हुआ था…..हमने दरवाजा खटखाटाया।

भारी आवाज में पूछा गया-कौन है….मैंने कहा आपसे मिलना है। क्या काम है…भीतर से आवाज आई। मैंने कहा आपसे मिलना चाहता हूं….पेशे से पत्रकार हूं। एक सेवादार आया और मुझे कुटिया के भीतर आने का इशारा किया। भीतर का महौल देखकर एक बार अनजाना सा डर भी लगा।

सुखाराम ने करीब 10 सेकंड तक आंखों में आंखे डाले रखी। लगा पता नहीं क्या कर रहा है। समझ गया हूं क्यों आए हो…..बोलो क्या चाहते हो……अघोरी ने कहा। अघोरी सुखाराम आस्ट्रेलिया का रहने वाला था। तंत्र क्रिया पर स्टडी करने के लिए यहां आकर रह रहा था। कुछ दिनों पहले वह नलखेडा में था। यहां आसाराम की कथा के दौरान अघोरी सुखाराम आसाराम के संपर्क मे आया था।

सुखाराम ने आसाराम की कथा में तबला भी बजाया था। वह अच्छा तबला वादक था। सुखाराम से मैंने कहा- ‘मुझे कुछ खबर मिली है कि आपके पास आसाराम का फोन आता रहता है कोई खास काम करवाना चाहता है।’ उसने पहले तो मना कर दिया। फिर मेरा ही इंटरव्यू लेने लगा। जाते-जाते अघोरी बोला- ‘तुझे फोन कर जल्दि बुलाऊंगा।’

दो-तीन दिन बाद सुखाराम का फोन आया। वह कहने लगा तुम सही आदमी हो। मैंने तुम्हारे बारे में सब पता करवा लिया है अब तुम शाम को मेरे से मिल सकते हो। मैं उसी दिन शाम को फिर उसकी कुटिया पर गया।

शाम के बाद रात का वक्त कुटिया में पहले से भी ज्यादा डरावना था। महौल में मांस-मदिरा और गांजे की मिलीजुली गंध से तामसिक वातावरण में दम घुट रहा था। अघोरी बोला- ‘आसाराम तंत्र विद्या की मारण क्रिया से पांच पत्रकारों को मरवाना चाहता है। ये सभी पत्रकार अहमदाबाद के एक गुजराती अखबार के हैं। आसाराम के खिलाफ लगातार लिखने और कई मामलों का खुलासा करने से आसाराम इनसे नाराज है। वो इन कांटों को अपने रास्ते से हटवाना चाहता है। मुझे तमाम सारा लालच देकर यह काम करवाना चाहता है।

तंत्र विद्या के अपने उसूल है। इस तरह किसी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना गलत हैं। मैं तुम्हे उसकी सारी रिकॉर्डिंग उपलब्ध करा दूंगा। एक हफ्ते बाद उसका एक प्रमुख सेवादार मुझसे मिलने आने वाला है। सेवादार पत्रकारों की फोटो, नाम आदि डिटेल्स लेकर आएगा। हम उसके साथ मिलकर स्टिंग ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे खबर में और भी ज्यादा प्रमाण जुटाए जा सकेगें।’

हमने अपने हेड ऑफिस को बताया। बॉस लोगों ने ग्रीन सिग्नल दिया। अघोरी सुखाराम के मुताबिक स्टिंग करने के लिए हमे ही पूरा बंदोबस्त करना था। अघोरी के साथ मिलकर पूरा प्लान किया। सेवादार तयशुदा तारीख और वक्त पर पंहुचा।

अघोरी ने हमे चेलों के रुप में सेवादार से मिलवाया। सेवादार से बातचीत के वक्त अघोरी, सेवादार और स्टिंग करने वाला कैमरा ही बंद कमरे में थे। इसी कमरे में अटैच लेट-बाथ थे। पूरी बातचीत के बाद अघोरी ने सेवादार को बाथरूम में फ्रेश होने भेज दिया और इसी वक्त स्टिंग डिवाईस को अपने साथ लेकर छुपा लिया। सेवादार को स्टेशन भिजवा दिया और ठीक इसी वक्त में अघोरी सुखाराम स्टिंग डिवाईस लेकर चंपत हो गया।

हमने जब डिवाईस खंगाली तो वहां कुछ नहीं था। इससे साफ हो गया कि अघोरी हमसे सिर्फ स्टिंग करवाना चाहता था। अघोरी सुखाराम के पास अब आसाराम के साथ मंच पर कथा में तबला बजाते हुए खुद की वीडियो, आसाराम की टेलिफोनिक रिकॉर्डिंग, उसके प्रमुख सेवादार का स्टिंग यानी एक टीवी खुलासे का पूरा मसाला उसके पास तैयार हो चुका था।

ये वो दौर था जब आसाराम का जबबर्दस्त बोलबाला था। अघोरी को भी आसाराम से डर था लेकिन साथ ही वह रुपए भी चाहता था। अघोरी आसाराम के खिलाफ इस बडे सबूत के जरिए पैसा भी कमाना चाहता था।

हमने अघोरी को तलाशना शुरु किया। अघोरी अपनी कुटिया से फरार हो चुका था। उसके फोन बंद आ रहे थे। किसी बडी साजिश की बू आ रही थी। हेड आॉफिस भी अघोरी को तलाशने में हमारी मदद कर रहा था। उसके तमाम संभावित ठिकानों पर हम पंहुचे लेकिन अघोरी का कहीं पता नहीं चला। तमाम खोजबीन के बाद अब चिंता इस बात की थी कि अघोरी कहीं दूसरे चैनल से मोलभाव कर हमारी मेहनत का लाभ उसको ना सौंप दे।

एक दिन अचानक अघोरी सुखाराम का फोन आया। फोन पर सुखाराम का अट्‌टहास सुनाई दिया। बहुत खोजबीन कर रहा है बेटा तू मेरी। मालूम है तुम पत्रकार लोग हो….हर तरफ मेरी घेराबंदी करा दी होगी। सुखराम बोला। मैंने कहा- ‘लेकिन यह तो गलत बात है आपने धोखा किया है।’ सुखाराम ने जवाब दिया- ‘कोई धोखा नहीं बेटा, मैं तुम्हारे चैनल पर ही इसका खुलासा करूंगा।

देखो बेटा इस खुलासे के बाद मुझे आसाराम मरवा देगा। मुझे तुरंत अपने देश लौटना होगा। मुझे पैसों की सख्त जरुरत है। तुम्हारा चैनल क्या मदद कर सकता है।’ मैंने कहा- ‘मैं इसके लिए आधिकारिक नहीं हूं, बॉस से बात करके बताता हूं।’
मैंने तुरंत अपने बॉस को इस फोन के बारे में बताया। इस वक्त सुखाराम अहमदाबाद में था। चैनल ने उसे अगली ही फ्लाईट से तुरंत दिल्ली आने को कहा। अब सुखाराम दिल्ली पंहुच चुका था।

दो दिनों के बाद दफ्तर से फोन आया। कल सुबह से आसाराम पर बडे खुलासे का प्रोमो चलाएगें और प्राईम टाईम में एक घंटे का स्पेशल शो होगा। अगले दिन जोर-शोर से इस खबर का प्रोमो शुरु हो गया। प्राईम टाईम में स्टूडियो से एंकर के साथ ही अघोरी सुखाराम लाईव था। खबर सिलसिलेवार टेलीविजन स्क्रिन पर थी। आसाराम समर्थक मेरा दफ्तर तलाशने लगे। देर रात कई लोगो की भीड दफ्तर पर हमला करने वाली है इसकी भनक लगते ही हम दफ्तर से रवाना हो गए और दफ्तर की पर्सनल सिक्योरिटी को अलर्ट कर दिया।

इस खबर ने कई दिनों तक सुर्खियां बटोरी। कई महीनों के बाद आसाराम के एक इंटरव्यू के लिए जब मैं उसके पास गया तो उसने मुझे मंच पर बने बुलेटप्रूफ बॉक्स के पास बुलाया और कहा कि तुम मुझसे अकेले में मिलो मैं तुम्हारी किस्मत बदल दूंगा।

आसाराम के अहमदाबाद आश्रम और छिंदवाडा आश्रम में बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद सरकार ने आसाराम मामले की जांच के लिए अहमदाबाद में एक आयोग गठीत किया। मुझे भी सम्मन मिला और मैं कई बार अहमदाबाद जाकर आयोग की तारिखों पर पेश हुआ। आसाराम के वकीलों ने मुझे चारों तरफ से घेरने की कोशिश की। आयोग ने उन दिनों पेशी पर आने के लिए मुझे विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई।

टीवी मीडिया में जोखिमभरी खबरों के बाद कानूनी दांव-पेंचो में फंसने का यह मेरा चौथा मौका था। इस तरह की खबरों से यह साफ था कि खबरों के कवरेज के दौरान कानून के दायरे में ही काम करना हमारे और परिवार के लिए बेहतर साबित होता है।