बिलासपुर. बलरामपुर जिले में वेतनवृद्धि होने के 6 साल बाद उसे अपात्र बताते हुए पैसा वसूली शुरू कर दी गयी थी, जिसपर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने वसूली कार्यवाही पर रोक लगा दी.

बलरामपुर के प्रधान पाठकों ने हाइकोर्ट में रिट याचिका लगाते हुए बताया कि साल 2014 में उन्हें बीएड करने की एवज में दो बार वेतनवृद्धि का लाभ मिला है, लेकिन अब 6 साल बाद अचानक एक आदेश निकाल कर कहा गया कि 16 जून 1993 के बाद भर्ती हुए शिक्षक वेतनवृद्धि के लिए पात्र नहीं हैँ, इसके बाद शिक्षकों को 10 दिन के अंदर वेतनवृद्धि के ज़रिये एक्स्ट्रा पैसा वापस देने को कहा गया. याचिका लगाने वालों ने बताया कि उन्हें 5 जनवरी 2011 के शासन के परिपत्र के आधार पर वेतनवृद्धि दी गयी, और ये परिपत्र आज भी यथावत है.

याचिकाकर्ताओं ने न्यायलय को बताया कि बिना किसी सुनवाई के अवसर के उनकी वेतनवृद्धि 6 साल बाद वापस ले ली गयी और वसूली के निर्देश दे दिए गए. अब मामले में सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने शासन से जवाब-तलब करते हुए बिना सुनवाई के वसूली कार्यवाई पर रोक लगा दी है