नई दिल्ली। पाकिस्तान के आर्थिक हालात अब तक के निचले स्तर पर जा पहुंचे हैं। सोमवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के नाम संबोधन किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि अब देश चलाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने देश वासियों को 30 जून तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने को कहा है ताकि सरकार देश के हालात सुधार सके।

पाकिस्तान की दयनीय स्थिति का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में भारत में संपन्न हुए आम चुनाव में क़रीब सात अरब डॉलर खर्च हुए हैं जबकि पाकिस्तान के पास इतना ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा है कि- 'पिछले 10 साल में पाकिस्तान का कर्ज छह हजार अरब से 30 हजार अरब रुपए तक पहुंच गया है। पाकिस्तान में टैक्स का आधा पैसा कर्जों कि किश्त अदा करने में चली जाती है, तो वहीँ बचे हुए पैसों से देश नहीं चल सकता। उन्होंने आगे ये भी कहा कि पाकिस्तानी कौम दुनिया में सबसे कम टैक्स देने वालों में से है। इमरान ने लोगों को 30 जून तक अपनी बेनामी संपत्ति घोषित करने का कहा है।

पाकिस्तान आईएमएफ से छह अरब डॉलर का कर्ज ले रहा है और इस क़र्ज़ के एवज में इमरान खान की सरकार ने वादा किया है कि वो देश की आर्थिक नीतियां उसकी शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ाएंगे। सरकार और क़र्ज़ दोनों साथ साथ चल रहे हैं। सरकारी खर्चों में क़र्ज़ का हिस्सा 30.7 फीसदी रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार शून्य है। पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते आतंकवाद ने उसे कंगाली की दहलीज़ पर ला कर खड़ा कर दिया।