नई दिल्‍ली। भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मुहम्मद के जिस मदरसे पर हमला किया, वो अब भी सलामत खड़ा है। ये कहना है अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का। रॉयटर्स का दावा है कि मदरसे की ताज़ा तस्वीरों को देखकर उस पर हुई किसी हवाई बमबारी का स्पष्ट निशान नहीं मिलता। मदरसे की छत, दीवार या उसके आसपास की किसी चीज पर भी हवाई अटैक का कोई बड़ा या साफ निशान नज़र नहीं आता। रॉयटर्स ने लिखा है कि उन्होंने इस बारे में भारत के विदेश और रक्षा मंत्रालय को ईमेल करके सवाल भी किया, ताकि उनका स्टैंड पूछा जा सके। मगर भारत की तरफ से अभी तक कोई जवाब दिया नहीं गया है।

रॉयटर्स ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के आधार पर ये खबर दी है कि ये जैश के उसी मदरसे की तस्वीरें हैं जिनके ऊपर इंडियन एयर फोर्स ने हमला किया। रॉयटर्स ने जो तस्वीर दिखाई है, उसमें जंगल के बीच एक इमारत नज़र आ रही है। रॉयटर्स का कहना है कि सैटेलाइट से ली गई ये तस्वीरें हाई-रेजॉल्यूशन की हैं। इसमें 28 इंच छोटे साइज वाले ब्योरे भी साफ नज़र आ रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अप्रैल 2018 में भी इस जगह की तस्वीर ली गई थी। 4 मार्च 2019 को ली गई फोटो और अप्रैल 2018 की उस फोटो में कोई बड़ा अंतर नहीं दिख रहा है।

मदरसे को किया गया था टारगेट लेकिन वह सुरक्षित

एजेंसी के मुताबिक 4 मार्च को ली गई तस्वीर में मदरसे की इमारत की छत में कोई छेद नहीं दिख रहा। न किसी दीवार को कोई नुकसान दिख रहा है और न ही मदरसे से सटे किसी पेड़ को कोई नुकसान हुआ नज़र आ रहा है। ये तस्वीर प्लेनेट लैब्स ने दी हैं। ये सैन फ्रांसिस्को स्थित एक प्राइवेट सैटेलाइट ऑपरेटर है। ये फोटो 4 मार्च को ली गई बताई जा रही है। इसमें जैश के उस मदरसे की कम से कम छह इमारतें दिख रही हैं। 4 मार्च यानी भारतीय वायु सेना के किए हमले के छह दिन बाद। भारत ने 25 और 26 फरवरी की दरमियानी रात को अटैक किया था। अटैक का टारगेट यही मदरसा था। भारत का कहना है कि इस अटैक की वजह से वहां काफी नुकसान हुआ। 26 फरवरी को भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा था कि हमारे किए हमले में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी, ट्रेनर, सीनियर कमांडर्स और जिहादी बहुत बड़ी संख्या में मारे गए।

भारत के दावों पर सवाल

रॉयटर्स का कहना है कि सैटेलाइट की इन तस्वीरों ने नरेंद्र मोदी सरकार के किए दावों पर और शक पैदा कर दिया है। भारत का स्टैंड है कि 26 फरवरी को मुंह-अंधेरे इंडियन एयर फोर्स के विमानों ने खैबर-पख्तूनख्वा स्थित जैश के इस मदरसे पर अटैक किया। ये मदरसा जबा टॉप पर बना हुआ है। भारत का कहना है कि हमारे हमले का टारगेट ही ये मदरसा था और इस अटैक में मदरसे को और वहां रहने वाले आतंकियों को जान-माल का काफी नुकसान हुआ है।

विशेषज्ञ भी मान रहे नुकसान का कोई सबूत नहीं

रॉयटर्स ने मिडलबरी इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज़ के ईस्ट एशिया नॉनप्रॉलिफेरेशन प्रॉजेक्ट के डायरेक्टर जेफरी लूइस से भी बात की है। जेफरी के पास सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा का 15 साल का अनुभव है। जेफरी के मुताबिक, मदरसे की सैटेलाइट तस्वीरों को देखकर किसी भी तरह की बमबारी से हुए किसी नुकसान का सबूत नहीं मिलता। जेफरी ने प्लेनेट लैब्स की ली गई इस लोकेशन की तीन और हाई-रेजॉल्यूशन तस्वीरों को भी देखा।