भिलाई। चरोदा में एक अजीब मामला सामने आया है। एक व्‍यक्ति ने अपनी जिंदा पत्‍नी का डे‍थ सर्टिफिकेट बनवा लिया है। अब उस व्‍यक्ति की मौत हो चुकी है। जिंदा पत्‍नी अब अपने दो बच्‍चों के साथ खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तर के चक्‍कर लगा रही है। यह मामला छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृहनगर चरोदा का ही है।

 

जानकारी के अनुसार, यहां जीवित महिला को प्रशासन द्वारा सात साल पहले मृत घोषित कर दिया गया। राजेश्वरी खुद को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटते भटक रही है। उसने अब नए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। इंदिरा नगर निवासी डी. राजेश्वरी ने बताया कि उनके पति दुर्गा प्रसाद की मृत्यु मार्च 2018 में हो गई थी।

रेलवे में कार्यरत रहे पति की पेंशन के लिए जब उन्होंने आवेदन किया तो अधिकारियों ने बताया कि उनके पास जमा कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक दुर्गा प्रसाद की पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी है। यह सुनते ही राजेश्वरी के पैरों तले जमीन खिसक गई। राजेश्वरी ने बताया कि तब से वह पेंशन के लिए रेलवे दफ्तर और खुद के मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त कराने को लेकर नगरनिगम कार्यालय के चक्कर लगा रही है, लेकिन कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।

पीडित डी. राजेश्वरी ने बताया कि मैं मुख्यमंत्री के गृहनगर की हूं। अब उन्हीं से न्याय मिलने की उम्मीद है। थक-हार कर मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा कि जल्द से जल्द मेरे नाम से बना मृत्यु प्रमाणपत्र रद्द कराया जाए, ताकि पति की मृत्यु के बाद मिलने वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं शुरू हो सके।

राजेश्वरी ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। दोनों पढ़ाई कर रहे हैं। घर तो जैसे-तैसे चल जा रहा है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का खर्च, फीस आदि के लिए दिक्कत हो गई है। परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहा है। राजेश्वरी ने कहा कि जल्द ही पति की नौकरी के दौरान का पैसा और पेंशन नहीं मिला तो उनका परिवार सड़क पर आ जाएगा।

नगर निगम भिलाई तीन (चरोदा) के आयुक्त चन्दन शर्मा ने कहा है कि आवेदिका के पति ने अपनी पत्नी की मृत्यु की गलत जानकारी देकर 2011 में प्रमाणपत्र बनवा लिया था। सात साल बाद पति की मौत के बाद महिला सामने आई तब इसकी जानकारी प्रशासन को हुई। मामला तब का है, जब भिलाई-चरोदा नगर निगम नहीं, बल्कि नगरपालिका हुआ करता था। तहसीलदार को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है। मृत्यु प्रमाणपत्र को सप्ताह भर के भीतर निरस्त करने के बाद दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।