By संतोष यादव

जगदलपुर। अंग्रेजों के खिलाफ 1910 में बस्तर रियासत को बचाने लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीद गुंडाधूर की प्रतिमा पर राजमाता कृष्ण कुमारी देवी ने रविवार की दोपहर माल्यार्पण करने के साथ ही शहीदों को नमन किया। बड़ी संख्‍या में आदिवासी समुदाय के लोग भी इस आयोजन में शामिल हुए।

भूमकाल के बारे में सुकमा जमींदार कुमार जयदेव ने बताया कि शहीद गुंडाधुर के साथ ही सैकड़ों आदिवासियों द्वारा 1910 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की गई थी। इस बगावत को मुख्य रुप से अंग्रेजों द्वारा जंगल और जमीन से बेदखल किया जाने, बिना परिश्रमिक के कार्य कराने, जमींदारी व्यवस्था का विरोध करने के लिए शुरू किया गया था। अंग्रेजों द्वारा बहू बेटियों को प्रताड़ित किया जा रहा था। अंग्रेजों के खिलाफ चली उस लड़ाई में अंग्रेजों द्वारा शहीद गुंडाधुर के साथ ही ग्रामीणों को गोल बाजार शहीद डेबरी धुर इमली पेड़ में फांसी पर लटका दिया गया था। शहीदों के इस बलिदान को याद करते हुए आज 109वीं भूमकाल दिवस मनाया गया।

रविवार को शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय व पीजी कॉलेज से छात्रों का दल रैली के माध्यम से शहीद गुंडाधुर पार्क पहुंचा। जहां सभी ने शहीदों को नमन करने के साथ ही एक रैली निकालते हुए गोल बाजार स्थित डेबरीधूर पहुंचे, और सभी शहीदों को याद किया और उनके द्वारा लड़ी गई लड़ाई को भी सभी को बताया गया। भूमकाल दिवस के दौरान सभी क्रांतिकारियों को उल्टा जिंदा इमली के पेड़ में टांग दिया गया था।

रैली के समापन होने पर टाउन क्लब पर एक भूम काल स्मृति दिवस मनाया गया और क्रांतिकारियों की लड़ाई के बारे में सभी को जानकारी देने के साथ ही नमन भी किया गया।