बहराइच। अपने बयानों की वजह से हमेशा चर्चा में बनीं रहने वाली भाजपा की सांसद सावित्री बाई फुले ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। फुले अपने बयानों से अक्सर अपनी ही पार्टी के सामने मुश्किलें खड़ी कर देती थीं। यूपी के बहराइच से सांसद फुले ने इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी पर वादाखिलाफी करने और समाज को बांटने के गम्भीर आरोप लगाए हैं। इस दौरान फुले ने दो टूक कहा कि जब तक मैं जिंदा हूँ,  दोबारा बीजेपी में वापस नहीं लौटूंगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अपने कार्यकाल तक वह सांसद बनी रहेंगी।

बीजेपी को बताया दलितों के खिलाफ़

एक प्रेसवार्ता में इस्तीफे के ऐलान के साथ ही फुले ने बीजेपी और आरएसएस पर जमकर हमला बोला। लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में फुले ने कहा, 'बीजेपी दलितों के विरोध में है। बाबा साहेब की प्रतिमा पूरे देश में कई जगह तोड़ी गई, लेकिन तोड़नेवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बार-बार बीजेपी के बड़े नेता संविधान बदलने की बात कहते हैं लेकिन आज तक प्राइवेट सेक्टर में एससी-एसटी के लिए आरक्षण लागू करने का वादा नहीं निभाया गया।'

मोदी सरकार पर जातिगत राजनीति का आरोप

केंद्र की मोदी सरकार पर निशान साधते हुए सांसद ने कहा कि कालाधन विदेश से वापस लाने का वादा भी पूरा नही किया गया। मंदिर-मस्जिद का खौफ दिखाकर आपसी भाईचारा खत्म किया जा रहा है। फुले ने आरोप लगाया कि दलित सांसद होने की वजह से उनकी कभी बात नहीं सुनी गई और हमेशा उपेक्षा की गई।

गौरतलब है कि फुले हमेशा से विवादास्पद बयान देने के लिए मशहूर रही हैं। पिछले ही दिनों राम मंदिर के मुद्दे पर फुले ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। इस दौरान सांसद ने राम मंदिर को मंदिर न बता देश के तीन प्रतिशत ब्राह्मणों की कमाई का धंधा करार दिया था। इससे पहले उन्होंने भगवान राम को शक्तिहीन बताते हुए कहा था कि अगर उनमें शक्ति होती तो अयोध्या में राम मंदिर बन जाता।

एक अन्य बयान में सांसद ने कहा था कि भगवान हनुमान मनुवादी लोगों के गुलाम थे। फूले ने भगवान राम को मनुवादी बताया और कहा कि अगर हनुमान दलित नहीं थे तो उन्हें इंसान क्यों नहीं बनाया गया? उन्हें बंदर क्यों बनाया गया? उनका मुंह क्यों काला किया गया...?

सांसद होकर भी नहीं कर पा रही थी अपनों का भला

उन्होंने कहा था, 'मैं सांसद नहीं बनती, अगर बहराइच की सीट सुरक्षित नहीं होती। बीजेपी की मजबूरी थी कि उन्हें जिताऊ उम्मीदवार चाहिए था तो मुझे टिकट दिया गया। मैं उनकी गुलाम नहीं हूं। अगर सांसद होकर भी अपने लोगों की बात न कर सकूं तो क्या फायदा?'