नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया है। इस खबर सार्वजनिक तब हुई जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा कि- ''सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल किए जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कमिटी ने आलोक वर्मा को फिर पद से हटा दिया। वर्मा की बात भी सुनी नहीं गई। राफेल घोटाले में मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का डर! किसी भी जांच को रोकने के लिए कितनी तेज़ी है।''



गौरतलब है कि दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के केंद्र के फ़ैसले को निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के निर्णय को ग़लत बताया था। 75 दिनों बाद आलोक वर्मा ने अपने पद पर वापसी की थी। अदालत ने इस मामले को चयन समिति के पास भेजने का आदेश दिया था। आपको बता दें कि चयन समिति के सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ़ जस्टिस होते हैं। चयन समिति ने अपना फ़ैसला दे दिया है। चयन समिति के पास सीबीआई निदेशक की नियुक्ति और इन्हें पद से हटाने का पावर होता है।

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इस मामले में अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने या उनके अधिकार छीनने के लिए भी चयन समिति ही अंतिम फ़ैसला ले सकती है। सर्वोच्च अदालत ने उन्हें पद पर बहाल करते हुए कहा था कि आलोक वर्मा इस दौरान कोई नीतिगत फ़ैसला नहीं ले पाएंगे। आलोक वर्मा चाहें तो प्रशासनिक फ़ैसले ले सकते हैं।लेकिन अदालत ने ये साफ़ नहीं किया है कि नीतिगत फ़ैसले क्या होंगे और प्रशासनिक फ़ैसले क्या होंगे। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के मामले में पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। ग़ौरतलब है कि छुट्टी पर भेजे जाने के आदेश के ख़िलाफ़ सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। कॉमन कॉज़ नाम की एक ग़ैर-सरकारी संस्था ने भी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।