स्याना हिंसा में 27 नामजद और अन्य 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज



लखनऊ। बुलंदशहर के स्याना इलाके में सोमवार को गोकशी की अफवाह के बाद फैली हिंसा और इसमें एक एसएचओ समेत दो लोगों की हत्या के मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को हिरासत में लिया है। मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार के अनुसार, मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) को सौंप दी गई है। आईजी मेरठ जोन की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है, जिसमें 3-4 सदस्य होंगे। एसआईटी इस बात की जांच करेगी कि गोकशी के मामले में शिकायत दर्ज करने के बावजूद हिंसा क्यों भड़की? और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़कर बाकी पुलिसकर्मी क्यों भाग खड़े हुए? पुलिस ने हिंसा के इस मामले में 2 एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें से एक गोकशी करने वाले आरोपियों के खिलाफ की गई है, वहीं दूसरी एफआईआर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले आरोपियों के खिलाफ की गई है। खबर के अनुसार, एफआईआर में 87 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें से 27 लोगों को नामजद और 60 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। एबीपी न्यूज के अनुसार, एसएचओ की हत्या में हिंदूवादी संगठन के लोगों का नाम आ रहा है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

स्याना हिंसा में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कुछ आरोपी बजरंग दल, बीजेपी युवा मोर्चा और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता है। हिंसा में योगेश राज और सतेंद्र राजपूत को मुख्य आरोपी बनाया गया है। योगेश बजरंग दल का जिला संयोजक बताया जा रहा है। सभी आरोपी स्याना इलाके के ही रहने वाले हैं। एक आरोपी शिखर अग्रवाल भाजपा युवा मोर्चा का नगर अध्यक्ष और उपेंद्र राघव को विश्व हिंदू परिषद का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। फिलहाल चमन, देवेंद्र और एक अन्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है।

वहीं इस हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान एसएसपी, डीएम समेत कई वरिष्ठ पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि के बाद शहीद इंस्पेक्टर के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भेज दिया गया। ऐसी खबर है कि शहीद इंस्पेक्टर के परिजनों का आरोप था कि इंस्पेक्टर के पार्थिव शरीर को तिरंगे में नहीं लपेटकर उचित सम्मान नहीं दिया गया। हालांकि परिजनों की इस शिकायत की जानकारी होते ही पुलिस अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई दी।