नई दिल्ली। चंद्रयान-2 मिशन अपने सफल मिशन भले ही दो कदम दूर रह गई, लेकिन इसरो अभी उम्मीदों का दामन नहीं छोड़ा है। 5 अक्टूबर से चांद पर सुबह होगी। इसके बाद इसरो के वैज्ञानिक एक बार फिर से लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश तेज करेंगे। ऐसे में ISRO समेत अमेरिका की नासा भी विक्रम से संपर्क करने की कोशिश में लग गई है। जल्द से जल्द उस जगह की तस्वीरें ली जाएं जहां लैंडर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी। उम्मीद की जा रही है कि 17 अक्टूबर तक अच्छी न्यूज मिल सकती है। नासा पहले भी कह चुका है कि वो 17 अक्टूबर को भी लैंडर विक्रम से जुड़ी तस्वीरों को लेकर कुछ नए तथ्य सामने ला सकता है।

हालांकि अच्छी खबर से पहले टीम इसरो के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जो बनी हुई है वो है चांद पर आ रहे भूकंप और बर्फीली हवाएं। ऐसे में घनी काली रात के साथ इन दो बड़ी मुसीबतों के कारण टीम को सबसे बड़ी चिंता इसी बात की है कि 14 दिन का रात खत्म होते ही लैंडर विक्रम किस स्थिति में होगा। दरअसल लैंडर विक्रम से संपर्क करने लिए इसरो अब भी तैयार है।

संपर्क के लिए इसरो ने अपनी तरफ से पिछले दिनों में कुछ और योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं के तहत लैंडर विक्रम से संपर्क करने की दोबारा कोशिश भी की जाएगी, लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ी चुनौती है वो है भूकंप और बर्फीली हवाएं। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग से पहले इसरो ने जानकारी दी थी कि लैंडर और रोवर की मिशन लाइफ एक चंद्र दिवस के बराबर है, जो धरती के 14 दिनों के बराबर है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतने दिनों बाद लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करना काफी मुश्किल होगा। इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक इतने दिनों के बाद संपर्क करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा, लेकिन कोशिश करने में कोई दिक्कत नहीं है। लैंडर विक्रम के अंदर हुआ नुकसान इसरो अधिकारी की मानें तो चांद पर हार्ड लैंडिंग के दौरान लैंडर विक्रम को काफी नुकसान हुआ है। बाहरी सतह के साथ लैंडर विक्रम के अंदर भी नुकसान हुआ है। लेकिन जब तक लैंडर विक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती तब तक कुछ भी दावे से कहना मुश्किल है।

इसरो अधिकारी के मुताबिक चांद पर रात के समय लैंडर को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना होगा। इस समय वहां काफी ज्यादा सर्दी होगी। इसके अलावा वहां आने वाले भूकंप के झटके भी चिंता बढ़ाए हुए हैं। चांद पर पांच अक्टूबर से दिन निकलना शुरू होगा। ऐसे में ISRO समेत दुनिया की तमाम स्पेस एजेंसियां जिनमें नासा भी शामिल है।