बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ शासन से पुलिसकर्मियों के खाते से बिना उनकी सहमति के पैसे काटने को लेकर लगाई की याचिका की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता योगेश्वर शर्मा ने बताया कि याचिका की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकल बेंच ने नोटिस जारी कर शासन से पूछा कि इस प्रकार का गैर शासकीय फंड कैसे बना और पुलिस कर्मचारियों के वेतन से कटौती कैसे हो रही है।

शर्मा ने बताया कि पुलिस विभाग ने परोपकार निधि, कल्याण निधि, शहीद सम्मान निधि, और सेवा सम्मान निधि के नाम पर प्रत्येक के खाते से 600 रुपये 4600 रुपये तक कटौती की है।

उन्होंने आगे बताया कि बिना सहमति और पूर्व जानकारी के वेतन राशि में कटौती से परेशान पुलिसकर्मियों ने शिकायत डीजीपी से किया। जहां त्वरित राहत ना मिलता देख उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर किया है। जिसकी सुनवाई 9 नवंबर को होगी।

शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मियों के अनुसार विभाग ने बिना सहमति के वरिष्ठता क्रम के अनुसार सभी के सैलेरी खाते से पैसे काटे है। पांच साल की नौकरी वाले पुलिसकर्मियों से 600 रुपये तो दस साल की सर्विस वालो से 600 रुपये काटा गया, जो अनुचित है। प्रदेश में हजारो की संख्या में पुलिसकर्मी है ऐसे में करोडो रुपये विभाग ने विभिन्न निधि के नाम पर जमा किया है।

उन्होंने ने बताया कि पुलिसकर्मियों के खाते से बिना उनकी सहमति के पैसे काटने पर पुलिसकर्मियों में आक्रोश है। विभाग ने पुलिसकर्मियों के सैलेरी अकाउंट से बिना उनकी सहमति के 600 से 600 रुपये काट दिया है, जिसे लेकर अक्टूबर माह में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।