रायपुर। केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली के विवादित ट्वीट पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी उन्हें आड़े हाथ लिया। भूपेश बघेल ने अरुण जेटली पर पलटवार करते हुए कहा कि 2013 विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों के सहयोग से हुई सुपारी किलिंग क्या भूल गए आप? इस घटना में नक्सलियों ने हमारे शीर्ष नेता पूर्व मंत्री महेन्द्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की हत्या कर दी थी।

सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट किया, “ब्लॉग मंत्री जेटली जी! झीरम का नाम तो सुना ही होगा? 2013 में विधानसभा चुनाव से पहले नक्सलियों के सहयोग से हुई सुपारी किलिंग क्या भूल गए आप? हमारे सभी नेताओं का नाम पूछ पूछ कर नक्सलियों ने उन्हें मारा था। महेंद्र भैया, नंदू भैया, विद्या भैया सहित  कांग्रेस के 31 नेता शहीद हुए थे।”

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केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली राहुल गांधी और कांग्रेस पर माओवादियों से गठबंधन का निराधार आरोप जनता को गुमराह करने के लिये लगा रहे हैं, जो मोदी सरकार के 55 महीने के कार्यकाल में नक्सली मोर्चे पर असफलता को ढंकने की नाकाम कोशिश मात्र है।

इसके अलावा उन्होंने अरुण जेटली पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि- नक्सल प्रभावित राज्य को कम पैसा और कम नक्सल प्रभावित राज्य को ज्यादा पैसा अरुण जेटली ने किस आधार पर दिया गया। उत्तर प्रदेश में कोई भी जिला गहन नक्सली हिंसा से प्रभावित नहीं है और न ही पिछले चार वर्षों में वहां कोई गंभीर वारदात हुई है लेकिन वर्ष 2014 से 2018 के बीच उत्तर प्रदेश के नक्सली हिंसा ने निपटने के लिए 349.21 करोड़ की राशि दी गई जबकि इसी अवधि में छत्तीसगढ़ को सिर्फ़ 53.71 करोड़ की राशि दी गई। जबकि छत्तीसगढ़ देश का सर्वाधिक नक्सल प्रभावित प्रदेश है और कई जिले गहन नक्सली गतिविधियों के लिए जाने जाते है। छत्तीसगढ़ माओवादी हिंसा और सर्वाधिक माओवाद प्रभावित क्षेत्र के लिये पूरे देश में जाना जाता है।

शैलेश नितिन त्रिवेदी का कहना है कि मंत्रालय के वर्ष 2012 से 2017 तक के आंकड़ो के अनुसार सबसे अधिक नक्सली हिंसा में मारे गए लोगों की संख्या पिछले छह सालों में सबसे अधिक 2017 में रही है। वर्ष 2012 में 109, 2013 में 111, 2014 में 112, 2015 में 101, 2016 में 107 और 2017 में 130 जानें गई हैं। वर्ष 2017 में 2015 और 16 की तुलना में सर्वाधिक सुरक्षाकर्मियों की जानें गईं। 2015 और 16 में क्रमशः 48 और 38 जवान मारे गए थे लेकिन 2017 में 60 जवानों की मौतें हुईं।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के कांग्रेस और माओवादियों से संबंध के आरोप के बारे में कांग्रेस ने कहा है कि देश में माओवाद का सबसे बड़ा शिकार कांग्रेस हुई है और वह लगातार न्याय की गुहार लगाती रही है। भाजपा की सरकारें हमारे ज़ख्मों पर मरहम तो लगा नहीं सकीं, अब जेटली उल्टे ज़ख्मों को कुरेदकर उस पर नमक-मिर्च लगा रहे हैं। जेटली जी का आरोप झीरम कांड की जांच की पीड़ा से भी उपजा है। अरूण जेटली और शीर्ष भाजपा नेतृत्व बखूबी जानता हैं कि झीरम के षडयंत्र में किसका-किसका नाम आएगा। वादे करके भी झीरम की जांच न करवाने वाली भाजपा जानती है कि कांग्रेस के दिग्गजों की सुपारी किलिंग किसने और कैसे करवाई? झीरम के आपराधिक राजनैतिक षड़यंत्र की जांच शुरू होने की बौखलाहट में अरूण जेटली ने यह बयान दिया है।

अरुण जेटली की सरकार ने जब नोटबंदी लागू की थी तो उन्होंने कहा था कि इससे माओवादी घटनाओं की रोकथाम हो सकेगी, लेकिन माओवादी घटनाओं में मारे जाने वाले पुलिस जवानों की संख्या लगातार बढ़ती रही, जिसकी अरुण जेटली को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहिये।