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By संतोष ठाकुर

जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बस्तर में औद्योगिक विकास पर संगोष्ठी का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन बुधवार 6 मार्च को सुबह 11 बजे कुम्हरावंड स्थित शहीद गुण्डाधूर कृषि महाविद्यालय परिसर के सभागार में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग मंत्री कवासी लखमा करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रुप में कृषि, पशुपालन, मछलीपालन व जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चैबे शामिल होंगे।

संगोष्ठी में नगरनार स्टील प्लांट के संभावित सहायक उद्योगों की स्थापना तथा कृषि एवं वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना पर विचार-विमर्श होगा। यहां एनएमडीसी के प्रतिनिधियों के साथ ही कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, वन विभाग, कृषि महाविद्यालय और उद्यानिकी महाविद्यालय के प्रतिनिधि बस्तर में उद्योगों की संभावनाओं के संबंध में जानकारी देने के साथ ही उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।

संगोष्ठी में बस्तर सांसद दिनेश कश्यप, कांकेर सांसद विक्रम उसेंडी, संभाग के सभी विधायक, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, महापौर जतीन जायसवाल विशिष्टि अतिथि के रुप में मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव  मनोज पिंगुआ, बस्तर कमिश्नर अमृत कुमार खलखो, बस्तर कलेक्टर डॉ. अय्याज तम्बोली, उद्योग विभाग के संचालक  अनुराग पाण्डेय और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक अरुण प्रसाद उपस्थित रहेंगे।

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मुंबई। वित्तीय संकट से जूझ रही विमानन कंपनी जेट एयरवेज ने किराया नहीं चुकाने के कारण अपने दो और विमान खड़े कर दिए हैं। किराया नहीं चुकाने की वजह से कंपनी अब तक 23 विमान को परिचालन से बाहर कर चुकी है।

कंपनी ने बताया कि लीज समझौते के तहत लीज पर विमान देने वाली कंपनियों को पैसा नहीं दे पाने की वजह से दो और विमानों को परिचालन से बाहर करना पड़ा। साथ ही यह भी कहा कि किराये पर विमान देने वाली सभी कंपनियों से सक्रिय रूप से बातचीत की जा रही है। उन्हें नकदी की स्थिति को सुधारने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के बारे में नियमित जानकारी दी जा रही है। जेट एयरवेज ने कहा कि इन विमानों के खड़े होने की वजह से नेटवर्क में जो भी परेशानियां आ रही हैं, उन्हें कम-से-कम करने के सभी प्रयास हो रहे हैं। यात्रियों के साथ नागर विमानन महानिदेशालय को भी इस संबंध में नियमित जानकारी दी जा रही है। इससे पहले जेट एयरवेज ने किराया नहीं चुकाने की वजह से 27 फरवरी और 28 फरवरी को क्रमश: सात और छह विमान खड़े किए थे।

दुनिया

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नई दिल्ली देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी निवेश की पैरवी करते हुए लगातार कह रहे हैं कि विदेशी कंपनियां मेक इन इंडिया में निवेश करने के लिए आगे आएं। इससे भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने में मदद मिलेगी वहीं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। वहीं इससे उलट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी कंपनियों से बार-बार अमेरिका वापस बुलाने का आह्वान कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये कंपनियां मेक अमेरिका, ग्रेट अगेन अभियान का हिस्सा बनें।

इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेरीलैंड में कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कान्फ्रेंस (सीपीएसी) में सवाल किया- क्या भारत हमें बेवकूफ समझता है? ट्रम्प ने कहा कि वह बताना चाहते हैं कि सारा विश्व अमेरिका का सम्मान करता है। हम एक देश को अपने सामान पर 100 टैरिफ दें और उनके इसी तरह के सामान पर हमें कुछ न मिले, यह सिलसिला अब आगे नहीं चलेगा।

ट्रम्प ने कहा है कि भारत में टैरिफ की दरें बहुत ज्यादा हैं। अमेरिका से जाने वाली एक बाइक पर भारत 100 फीसद टैरिफ वसूलता है, जबकि वहां से आने वाले इसी तरह के सामान पर अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेता। उन्होंने कहा कि हम भी भारत से आने वाले सामानों पर इसी अनुपात में टैरिफ लगाएंगे। लगभग 5.6 अबर डॉलर (40 हजार करोड़) रुपए का सामान अमेरिका में निर्यात करने पर टैरिफ में रियायत दी जाती है। 1970 में बनाई गई योजना के तहत लाभ पाने वाला भारत विश्व का सबसे बड़ा देश है।

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नई दिल्ली। मारुति ने अपनी पॉप्युलर ऑफ रोड एसयूवी मारुति सुजुकी का प्रॉडक्शन ऑफिशली बंद कर दिया है। कंपनी ने ईमेल के जरिए डीलरशिप्स को बताया कि कंपनी ने मारुति सुजुकी का प्रॉडक्शन बंद कर दिया है और डीलरशिप्स अब इसके बुकिंग ऑर्डर्स रिसीव न करें। मारुति सुजुकी पिछले तीन दशक से भारतीय बाजार में मौजूद थी। 

जिप्सी को 1985 में लॉन्च किया गया था और इसे शुरुआती वर्षों में अच्छी सफलता मिली थी। बाद में डीजल से चलने वाली एसयूवी के आने के बाद यह केवल भारतीय सेना की पसंदीदा रह गई थी। मारुति सुजुकी को सेना से जिप्सी का पहला ऑर्डर 1991 में मिला था। इसके बाद से कंपनी सेना को 35 हजार से ज्यादा जिप्सी की सप्लाई कर चुकी है। कंपनी को जिप्सी के लिए सबसे बड़ा ऑर्डर सेना से पिछले वर्ष 4 हजार यूनिट्स से ज्यादा का मिला था।

वीइकल्स की जीएस 500 कैटिगरी में जिप्सी की मोनोपॉली रही है। यह कैटिगरी अधिकतम 500 किलोग्राम के पेलोड वाले वीइकल्स की होती है। सरकार ने अब जीएस 800 (800 किलोग्राम तक का पेलोड) की एक नई कैटिगरी शुरू की है, लेकिन जीएस 500 कैटेगरी को हटाने के बारे में सेना या मिनिस्ट्री से अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। इस वजह से हम यह नहीं कह सकते कि जिप्सी का सफर समाप्त हो गया है।

आर्मी ने लंबे समय तक किया इसका इस्‍तेमाल

मारुति सुजुकी जिप्सी लंबे समय तक इंडियन आर्मी का हिस्सा रही। हालांकि बाद में इंडियन आर्मी ने महिंद्रा स्कॉर्पियो और टाटा सफारी से अपनी वीइकल्स को रिप्सलेस किया। पर हाल ही में सेना ने 3,200 मारुति सुजुकी का ऑर्डर दिया था। सेना शहर की सड़कों से लेकर पहाड़ों और रेगिस्तान तक में इस ऑल-पर्पज वीइकल का इस्तेमाल करती है। इसमें मिलिट्री इक्विपमेंट को ले जाने के लिए बैक साइड पर हुक भी लगे होते हैं।

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