धर्म परिवर्तन को लेकर था शक

आदिवासी और ईसाई समुदाय के लोगों के बीच हुई झड़प

रांची। आदिवासियों के अंतिम संस्कार स्थल में ईसाई धर्म को मानने वाले महिला का शव दफनाए जाने को लेकर विवाद हो गया। आदिवासी समुदाय के लोग महिला के शव को कब्र से निकालकर कब्रिस्तान में ले जाने की मांग कर रहे थे। इस बात को लेकर दोनों समुदाय के लोगों के बीच झड़प हो गयी।

यह घटना लोहरदगा के शहरी क्षेत्र के कचहरी मोड़ की है। सदर थाना क्षेत्र के नदिया करचा टोली निवासी रजंती उरांव ने हाल में ही कथित तौर पर ईसाई धर्म को मानना शुरू कर दिया था। रजंती उरांव की घर में सीढ़ियों से गिरने से मौत हो गयी। परिजनों ने चुपचाप रजंती को लाकर कचहरी मोड़ स्थित आदिवासियों के अंतिम संस्कार स्थल में दफना दिया। इस बात की जानकारी जब आदिवासी समुदाय के लोगों को हुई तो वह भड़क गए। आदिवासी समुदाय के लोगों ने फरमान सुनाया कि वे किसी भी हाल में रजंती के शव को आदिवासियों के अंतिम संस्कार स्थल में दफनाने नहीं देंगे। पूरी पंचायत में कहीं भी उसे जगह नहीं दी जाएगी, जबकि रजंती के परिजनों का कहना था कि रजंती ने धर्म परिवर्तन नहीं किया। रजंती सिर्फ कुछ दिन चर्च गई थी। वह भी उसने जाना बंद कर दिया था। शव के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। इस बात को मानने को लेकर आदिवासी समुदाय के लोग तैयार नहीं थे।

घटना की जानकारी मिलने पर घटना स्थल पर पुलिस टीम पहुंची और दोनों ओर से विरोध की स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों से बात करने की कोशिश की। आदिवासी समुदाय के लोग अपनी मांग पर अड़े हुए थे। पुलिस प्रशासन ने ईसाई समुदाय के लोगों से बात करते हुए शव को ईसाई समुदाय के चिन्हित स्थान में ले जाकर दफनाया जायेगा। हालांकि एक शव के साथ इस प्रकार के व्यवहार को लेकर लोग निंदा भी कर रहे थे। जमा भीड़ का कहना था कि एक शव के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं होना चाहिए।