रमेश गुप्‍ता
भिलाई । इस्पात श्रमिक मंच और छत्तीसगढ़ मजदूर संघ (संयुक्त यूनियन) ने प्रबंधन स्तर के ट्रेनीज (एम.टी.टी) और  कर्मचारी स्तर के एसीटी-ओसीटी ट्रेनीज में हो रहे भेदभाव पर आवाज उठाई है।  इस्पात श्रमिक मंच एवं छत्तीसगढ़ मजदूर संघ ने कहां की प्रबंधन स्तर के ट्रेनीज  को  सेल मैनेजमेंट द्वारा प्रथम दिन से ही ई- वन अधिकारियों का मिनिमम बेसिक (ग्रेड पे) को स्टाइपेंड के रूप में दिया जाता है, एवं भिलाई इस्पात संयंत्र की सारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

जबकि भिलाई इस्पात संयंत्र में ही नहीं बल्कि पूरे  सेल स्तर पर डिप्लोमा और आईटीआई कर्मी ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मासिक मिनिमम बेसिक (एस-1एवं एस-3 कर्मचारियों) का ग्रेड पे ना देकर भेदभाव किया जा रहा है।

कर्मचारी स्तर के ट्रेनिंज नियमित कर्मियों की तरह उत्पादन में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं, किंतु नए कर्मियों को वेतन समझौते में हमेशा से हाशिए पर रखने की परंपरा के चलते हर एसीटी एवं  ओसीटी अपने सेवाकाल में डेढ़ से दो लाख रुपया तक का नुकसान झेलने मजबूर है।

 इस्पात श्रमिक मंच के अध्यक्ष  भावसिंह सोनवानी ने कहा की आज जब ट्रेनिंग सेवाकाल में जुड़ चुका है। तब नए कर्मियों को स्टाइपेंड की जगह पहले दिन से ही उसे ग्रेड पे (S-1,S-3) का मिनिमम बेसिक को पेमेंट दिया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ मजदूर संघ के उपाध्यक्ष  संदीप कुमार नायडू ने कहा कि एनजेसीएस यूनियन नए कर्मियों को प्रबंधन से यूनियन गतिविधियो में शामिल होने के लिए ट्रेनीज को अनुमति देने बात करने पहुंच जाती हैं। लेकिन ग्रेड पे स्टाइपेंड,डिग्रेडेशन, ग्रेजुएटी सीलिंग,व आवास जैसी समस्याओं पर बात तक नहीं करती है। इस्पात श्रमिक मंच के सचिव  यूनुस सिद्धकी ने कहा कि इन कर्मचारियों को मिलने वाले स्टाइपेंड  एवं अन्य सुविधाओं में दोहरा मापदंड रखना सीधा-सीधा अन्याय है। छत्तीसगढ़ मजदूर संघ के टाउनशिप सचिव  अरविंद पांडे ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करने वाले नए ट्रेनीज एवं नये कर्मचारी भारी आवास समस्या से जूझ रहे हैं।