रायपुर। प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य संयोजकों ने अपनी मांगों को लेकर लंबा आंदोलन किया। प्रदेश के सबसे बड़े संगठन के रूप में उभरे छत्‍तीसगढ़ स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक कर्मचारी संघ में अब गुटीय लड़ाई की स्थिति निर्मित हो गई है। यह लड़ाई ऐसे वक्‍त में शुरू हो रही है, जबकि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्‍मक मूड में दिख रही है। इसी कांग्रेस ने सत्‍ता में आने से पहले स्‍वास्‍थ्‍य संयोजकों के आंदोलनों में जाकर उनकी मांगों का समर्थन किया था। जाहिर तौर पर उनकी मांगों को लेकर सरकार संवेदनशील है, लेकिन दुर्भाग्‍यजनक यह कि स्‍वास्‍थ्‍य संयोजकों के बीच दो समूहों में वर्चस्‍व की लड़ाई इस कदर छिड़ी कि सोशल मीडिया में एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्‍पणी करने से भी नहीं चूक रहे हैं।



 

जानकारी के मुताबिक, कुछ दिनों पहले तक संघ की प्रांताध्‍यक्ष संध्‍या मोवले रहीं। एक गुट ने उन्‍हें अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाकर हटा दिया और टार्जन गुप्‍ता को प्रांताध्‍यक्ष मनोनीत किया। दूसरी तरफ, एक अन्‍य गुट अभी भी संध्‍या मोवले को अपना प्रांताध्‍यक्ष मान रहा है। स्‍वयं संध्‍या मोवले का खुद का भी मानना है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुने जाने के कारण वे अभी भी पद पर हैं और उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा नहीं दिया है।

इस विवाद के संबंध में पूछे जाने पर टार्जन गुप्‍ता कहते हैं, संघ के जिलाध्‍यक्षों के बीच संध्‍या मोवले को लेकर असंतोष था। उनका व्‍यवहार भी उचित नहीं था, बल्कि तल्‍ख था। इसके अलावा उन्‍होंने संघ के मद से जो राशि खर्च की, उसका ब्‍यौरा भी पेश नहीं किया। इसलिए जिलाध्‍यक्षों और पदाधिकारियों ने मिलकर अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाया और उन्‍हें हटाकर मुझे प्रांताध्‍यक्ष मनोनीत किया गया। निर्वाचन और मनोनयन की प्रक्रिया के संबंध में सवाल किए जाने पर टार्जन गुप्‍ता स्‍पष्‍ट करते हैं, कि नए प्रांताध्‍यक्ष की नियुक्ति में पूरी प्रक्रिया का विधिवत पालन किया गया है।

जब संध्‍या मोवले से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्‍होंने न केवल अविश्‍वास प्रस्‍ताव को अवैधानिक बताया, बल्कि उन्‍होंने विरोधी गुट पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। संध्‍या मोवले कहती हैं, कि यदि ऐसी कोई शिकायत थी, तो उस पर सार्वजनिक बैठक में चर्चा क्‍यों नहीं की गई। अविश्‍वास प्रस्‍ताव के एजेंडे पर बैठक किसने बुलाया, और कब बुलाया, इसकी भी मुझे जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में अविश्‍वास प्रस्‍ताव की प्रक्रिया और मनोनयन दोनों अवैधानिक है, क्‍योंकि उसमें संघ के बाय-लॉज का उलंघ्‍घन किया गया है।

आपको बता दें, संध्‍या मोवले ने सोशल मीडिया में उन पर अभद्र टिप्‍पणी करने के आरोप भी लगाए गए हैं। उन्‍होंने बताया कि संघ के WhatsApp Group में विरोधी गुट के एक सदस्‍य द्वारा तीन बार जेल से बाहर निकलने और देख लेने की भी धमकी दी गई है। खर्च का बिल सार्वजनिक न किए जाने के सवाल पर मोवले कहती हैं, कि ओपन प्‍लेटफॉर्म में बैठकर चर्चा करें, मैं सारा हिसाब बिल के साथ दूंगी। उनके एक-एक आरोपों का जवाब दूंगी, लेकिन वे सार्वजनिक चर्चा के लिए सामने आने की हिम्‍मत करें।