By पुनेश यादव

कांकेर। जिस उम्र में युवा अपना भविष्य बेहतर करने की तालीम लेते हैं ,उसी उम्र के बच्चों को झांसा देकर एक निजी कंपनी के नुमाइंदे लगातार क्षेत्र में ठगी कर रहे हैं। दरअसल परलकोट क्षेत्र में विगत छः महीनों से एक निजी कंपनी के नाम पर प्रत्येक रविवार को क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर स्कूली छात्रों को स्किल डेवलपमेन्ट के नाम पर बुलाकर बैठक ली जा रही है, जिसमें कई नाबालिग बच्चे भी शामिल होते हैं।

कंपनी के नुमाइंदों द्वारा बच्चों से 2000 हज़ार से लेकर 14000 रुपये तक लेकर उन्हें एक किट दिया जा रहा है, जिसमें कई दवाईयां भी शामिल हैं। बच्चों से इन दवाईयों को बेचवाने के साथ-साथ ही इन बच्चों से इस कंपनी में नये लोगों को जोड़ने की तालीम दी जा रही है।

अब तक इस कंपनी के नुमाइंदों द्वारा लगभग 200 से अधिक बच्चों को जोड़ा जा चुका है और साथ ही कई सैकड़ों यूनिट दवाईयां भी लोगों को दी जा चुकी है।

कंपनी की ओर से मीटिंग लेने पहुंची कांकेर जिले के चारामा निवासी कु. कामिनी साहू से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि उनके द्वारा जो दवाईयां बेची जा रही है, वो बिना किसी डॉक्टर के सुझाव के ही दिए जा रहे हैं। साथ ही जब उनसे कंपनी के रजिस्‍ट्रेशन और प्रशासन की अनुमति के बारे में पूछा गया तो गोलमोल जवाब मिला।

जब पुलिस को पखांजूर नगर पंचायत में स्थित हरिचांद स्कूल में चल रहे, इस ट्रेनिंग के बारे में पता चला तो पुलिस मौके पर पहुँची और कंपनी के नुमाइंदों को पूछताछ के लिए अपने साथ थाने ले गयी जिसमें कई नाबालिग भी थे। ख़बर लिखने तक पुलिस द्वारा कंपनी की ओर से ट्रेनिंग देने आयी कु. कामिनी साहू को चंद मिनटों बाद ही छोड़ दिया गया और अब तक पुलिस द्वारा इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गयी, जिससे ऐसे ठग कंपनियों के हौसले बुलंद है और परलकोट की जनता एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही के चलते ठगी के शिकार होने को तैयार है ।

कोयलीबेड़ा के बीएमओ डॉ. एन आर नवरत्न से जब इस संबंध में बातचीत की गई, तो उनका कहना था कि एमबीबीएस डॉक्‍टर के प्रिस्क्रिब्‍शन के बिना एलोपैथिक दवाई देना अपराध है। अगर स्मार्ट वेलु नाम का कंपनी एलोपैथिक दवाई नेटवर्क के ज़रिए बेच रही है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

एसडीओपी शोभराज अग्रवाल ने कहा है कि उक्त कंपनी द्वारा नेटवर्क के माध्यम से जो एलोपैथी दवाइयां बेची जा रही है, उस मामले में जाच चल रही है। खंड चिकित्सा अधिकारी को लिखित अवगत कराया जाएगा एवं गलत पाए जाने पर एफ आई आर दर्ज कर उचित कार्यवाही की जाएगी।