By प्रेमकुमार मणि 



इस साल की पहली जनवरी को हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने ए एन आई न्यूज़ चॅनेल पर  एक अनजाने से पत्रकार को साक्षात्कार दिया है। मैंने उसे देखा तो नहीं, लेकिन उसका ब्यौरा अख़बारों में पढ़ा है। इतने बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री जब बोलते हों, कोई इंटरव्यू  देते हों, तब उसे जानना जरुरी होता है ; क्योंकि उससे  मुल्क की तक़दीर जुडी होती है। लेकिन मैं पूरी तक़रीर पढ़कर गहरे उदास हुआ। जैसे हर बच्चा अपने अभिभावक अथवा माता -पिता पर गर्व करना चाहता है, वैसे ही हर नागरिक अपने प्रधानमंत्री पर। जब माता -पिता विपरीत आचरण करते हैं, तब बच्चों को लज्जित होना पड़ता है। नृत्यांगना  इज़ाडोरा डंकन ने अपनी आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि माता -पिता अपने बच्चों के लिए दौलत दें न दें , ऐसा चरित्र अवश्य दें कि वे उनपर गर्व कर सकें। काश ! हमारे पीएम इसे समझ पाते।

पीएम ने अनेक मुद्दों पर बहुत -सी बातें की। वह नोटबंदी पर बोले, जिसकी मैंने भी सराहना की थी, और जो विफल हुआ। जीएसटी, गौहत्या, तीन तलाक़ से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक पर बोले। बतलाया कि स्ट्राइक के समय आखिरी सिपाही के आने तक वह सोये नहीं थे। सुनने में यह बात काव्यात्मक भले ही लगे, हक़ीक़त तो यही है कि वह स्ट्राइक बहुत कम समय का था, मात्र एक -दो घंटे  का। और उसे कर के सिपाही कोई पैदल नहीं आ रहे थे। कुछ ही मिनटों में वे अपनी सीमा में रहे होंगे। अब इस ' महानता ' पर अपना माथा पकड़ने के सिवा हम क्या कर सकते हैं। यूँ , जानने की बात यह भी है कि ऐसे स्ट्राइक अनैतिक हैं और इस अनैतिकता पर प्रधानमंत्री को तो चुप्पी ही रखना श्रेयस्कर है। मोदीजी से मैं कहना चाहूंगा वह प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री  और इंदिरा गाँधी का स्मरण करें ,जिन्होंने  क्रमशः पाकिस्तान को  पराजित और विखंडित कर दिया था। 1971 में पाकिस्तान की एक लाख सशस्त्र सेना ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। वे दोनों प्रधानमंत्री उसी कांग्रेस पार्टी के थे ,जिसकी बुराई करते आप थकते नहीं और जिससे मुक्त भारत की डींग मारते रहते हैं। इस विषय पर इससे अधिक मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा। 

अब मैं उस बिंदु पर आना चाहूंगा , जो नितांत सामयिक है। प्रधानमंत्री ने उनकी पार्टी और गठबंधन के विरुद्ध बन रहे या बने राजनीतिक गठबंधन ,जिसे महागठबंधन से अभिहित किया गया है , पर तंज़ कसते हुए कहा है कि अगला लोकसभा चुनाव महागठबंधन और देश की जनता के बीच होगा। यह कह कर प्रधानमंत्रीजी ने राजनैतिक अभद्रता ही दिखलाई है। लोकतंत्र में चुनाव होते रहते हैं। सरकारें बदलती रहती हैं। लेकिन एक लोकतान्त्रिक आवेग या संस्कृति इसकी आत्मा होती है। इस संस्कृति का पहला पाठ यह है कि विपक्ष मज़बूत और जवाबदेह हो। यदि विपक्ष कमजोर और गैर जिम्मेदार हुआ तब लोकतान्त्रिक सरकारों के तानाशाह बनने की गुंजायश होगी। ऐसे ही अवसरों पर राजनैतिक संघर्ष संसद से उठ कर सड़क पर आ जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के साथ विपक्ष की भी देखभाल करते थे। यह इसलिए कि भारत में जनतंत्र की आधारशिला मज़बूत करने की जिम्मेदारी भी उन्ही के पास थी।

मैं अपने आदरणीय प्रधानमंत्रीजी से आग्रह करना चाहूंगा कि वह आत्मसमीक्षा करें उनका कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। दो -ढाई महीने के अंदर चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अब वह बतलायें कि उन्होंने किया क्या ? आप ही की पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना जैसी एक यादगार चीज छोड़ गए हैं आपने क्या किया ? हर शासक अपने एक -दो कार्यों के लिए ही याद किया जाता है नेहरू नए भारत की आधारशिला रखने के लिए याद किये जाते हैं ,तो शास्त्री जी हरित क्रांति और भारतीय जन मानस को  चीन की  पराजय के बाद उभरे अवसाद से मुक्त करने केलिए इंदिरा जी को बैंकों के राष्ट्रीयकरण और बंगलादेश की मुक्ति केलिए याद किया जाता है लेकिन दुर्भाग्य से आपके हिस्से नोटबंदी और जीरो बैलेंस पर खाता जैसी विफल योजनाएं ही बचती हैं सर्जिकल स्ट्राइक राष्ट्रीय गुंडागर्दी है, इसकी चर्चा कर के आप देश की प्रतिष्ठा धूमिल करते हो भारत की परंपरा संघर्ष की रही है, आप हमारी बहादुर सेना को इन छोटी कार्रवाइयों केलिए इस्तेमाल करते हो पाकिस्तान गलत है ,तो उसे करारा जवाब मिले आप आरएसएस की पाठशाला में सीखे -पढ़े डंडा -खेल का राष्ट्रीय स्तर पर प्रयोग करते हो .यह सब निंदनीय है

मोदी साहब, अब आपके मुद्दे पर आता हूँ आप कहते हो अगला लोकसभा चुनाव महागठबंधन और देश की जनता के बीच होगा लेकिन मुझे लगता है कि आनेवाला चुनाव भाजपा और भारत के बीच होगा आपके नेतृत्व में हिंदुत्व का चाहे जितना विस्तार हुआ हो भारत का नैतिक और सांस्कृतिक आयतन सिकुड़ता चला गया है भारतीयता खतरे में है जिस भारत को हज़ारों ऋषि -महर्षियों ,कवि-दार्शनिकों ने स्थापित-विकसित और समृद्ध  किया, उसे आपने हिंदुत्व के तंग मटके में समेटने की कोशिश की है हालांकि भारत को आप की इन कार्रवाइयों से कोई असर नहीं पड़ा है भारत ने अनेक सांस्कृतिक -राजनैतिक आक्रमण झेले हैं वह आपके आक्रमण को भी झेल लेगा

पिछले चुनाव में  रामायण कथा के एक पौराणिक पात्र मारीच की तरह आप भेष बदल कर आये थे आपने खुद को घांची -मोची जैसा कुछ बतलाया हिन्दू से पिछड़ा बन गए शूद्र काय -रूप में अपने संघी रूप को छुपा लिया इंदिरा गाँधी गरीबी हटाओ कहती थीं ,आप ने भ्रष्टाचार हटाओ का जुमला दिया मुल्क की जनता ने इन सब पर विश्वास किया और अपना वोट आपके हवाले कर दिया इस वोट के बूते आप जिस कुर्सी पर बैठे ,वहां से भारत की ही बुनियाद कमजोर करनी शुरू की इसलिए कहता हूँ, आने वाला चुनाव महागठबंधन और जनता के  नहीं, भाजपा और भारत के बीच होगा

प्रेम कुमार मणि ख्यात चिंतक और वरिष्ठ साहित्यकार हैं।

(आलेख में प्रस्तुत विचार लेखक के निजी हैं)