By रमेश गुप्ता

भिलाई। विधानसभा चुनाव तो निपट गए अब मतगणना के इंतजार में बैठे प्रत्याशियों के लिए हैरान करने वाली खबर है। जुनवानी में जिस भवन को जिला प्रशासन द्वारा स्ट्रांग रूम बनाया गया है। वहां निगरानी कर रहे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भूत का डर सता रहा है। हालांकि यह केवल चर्चा मात्र है लेकिन इस चर्चा में भी खास बात है। रात होने के बाद भवन से अजीब अजीब सी आवाजें निकलने की चर्चा है। पूरे कॉलेज परिसर में स्ट्रांग रूम बनाए गए भवन को लेकर ही इस प्रकार की चर्चा है।
बता दें कि जिले में चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति के बाद श्री शंकराचार्य कॉलेज जुनवानी के अंतिम छोर में बने भवन को स्ट्रांग रूम बनाया गया है। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर निर्वाचन आयोग ने कोई कोताही नहीं बरती है। 24 घंटे फोर्स की निगरानी के अलावा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी स्ट्रांग रूम की रखवाली में लगे हुए हैं। लेकिन एक बात इन प्रतिनिधियों को खाए जा रही है कि रात में भवन के भीतर से अजीब तरह की आवाजें क्यों आती हैं। आवाज भी ऐसी कि यहां निगरानी करने वाले लोग भी सोच में पड़ गए हैं कि यहां किसी भूत प्रेत का साया है। हालांकि आज के वैज्ञानिक युग में भूत प्रेत को कोई मानता नहीं लेकिन इसे लेकर कहीं न कहीं एक डर का माहौल रहता है जिसके कारण स्ट्रांग रूम भवन में भूत प्रेत का साया माना जा रहा है।

तो क्या भूत रखवाली कर रहा ईवीएम की?

स्ट्रांग रूम में भूत के साये की अफवाह के बीच वहां निगरानी में लगे प्रतिनिधि इस बात पर चुटकी ले रहे हैं कि हो न हो स्ट्रांग रूम ईवीएम की रखवाली भूत कर रहा है। स्ट्रांग रूम की रखवाली में लगे जवानों को जब इस चर्चा के बारे में पूछा गया तो उनका एक ही जवाब है भूत हमारे पास आ भी नहीं सकता। वहीं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि इस आशंका में हैं कि यहां भूत का साया है क्योंकि वे इस भवन को ही भूतिया मान रहे हैं।

लोकसभा चुनाव की मतगणना के दौरान भी हुई थी चर्चा

शंकराचार्य कॉलेज के उक्त भवन के भूतिया होने की चर्चा 2014 के लोकसभा चुनाव की मतगणना के दौरान भी हुई थी। स्ट्रांग रूम की निगरानी में लगे एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मतगणना के पूर्व वह स्ट्रांग रूम की निगरानी में लगा था। रात को सोने के बाद ऐसा महसूस हुआ कि किसी ने उसे उठाकर पटक दिया। अचानक नींद खुली तो खुद को जमीन पर पाया। इसके बाद वहां रुकने की हिम्मत नहीं हुई और दूसरे दिन वहां से निकल गया। हालांकि इस बात को लगभग चार वर्ष बीत गए हैं। एक बार फिर शंकराचार्य कॉलेज के उसी भवन को स्ट्रांग रूम बनाया गया है और एक बार फिर इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। जबकि मतगणना को अभी लगभग एक सप्ताह का समय बचा हुआ है।