रायपुर। देश भर में लोकसभा चुनाव की तैयारियां चरम पर हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर छत्तीसगढ़ में भी कई राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं। प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार को कर्मचारियों ने मुश्किल में डाल दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आश्वासन के बाद अगले वर्ष तक इंतजार करने की बात कहने वाला अनियमित कर्मचारियों का एक धड़ा भी अब आंदोलन की राह पर वापस लौट रहा है। जो सरकार के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है।

इस धड़े ने 10 मार्च को राजधानी रायपुर में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। अनियमित कर्मचारियों का वह धड़ा भी प्रदेशव्यापी धरने पर बैठेगा। मतलब, एक बार फिर प्रदेश के सभी एक लाख 80 हजार अनियमित कर्मचारी लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं।

बता दें कि पिछले साल विधानसभा चुनाव के पहले अनियमित कर्मचारियों ने एक बैनर तले आंदोलन की शुरुआत की थी। छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ से 52 सरकारी विभागों के 72 कर्मचारी संघ जुड़े थे। चुनाव के पहले लगातार 23 दिन आंदोलन किया गया था, तब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने धरनास्थल पहुंचकर वादा किया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अनियमित कर्मचारियों की मांगों को पूरा किया जाएगा। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अनियमित कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल दो बार मुख्यमंत्री और एक बार मंत्री सिंहदेव से मिलकर उन्हें वादा याद दिलाया। लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें अगले साल का आश्वासन दे दिया। जिसके बाद छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ और छत्तीसगढ़ संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ में अनियमित कर्मचारी बंट गए हैं। 24 फरवरी को संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ ने सीएम हाउस को घेरने की कोशिश करके आंदोलन जारी रखने का संकेत दे दिया था, जबकि संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ ने सीएम के आश्वासन पर इंतजार करने की बात कही थी।

अब संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों पर अपने लोगों का दबाव है। इस कारण वे भी लोकसभा चुनाव के पहले सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। अभी सेवा से अलग किए गए अनियमित कर्मचारियों को वापस काम देने की मांग भी होगी। अनियमित कर्मचारियों का एक धड़ा छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ को प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ का समर्थन मिला हुआ है। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामत्री विजय झा का कहना है कि अनियमित कर्मचारी एक साल से आंदोलन कर रहे हैं। जब विपक्ष में रहकर कांग्रेस ने उन्हें आश्वासन दिया था, तो अब सरकार बनने के बाद आश्वासन को पूरा किया जाना चाहिए।