रायपुर। कहते हैं कि मकर संक्रांति सर्दियों का आख़िरी त्यौहार होता है और लोग इस दिन को नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। इस दिन कुछ लोग खिचड़ी बनाते हैं, कुछ तिल के लड्डू, तो वहीं किसी-किसी शहर में पतंग उड़ाकर इसे सेलिब्रेट किया जाता है। पक्षियों का भी इस धरती पर उतना ही अधिकार है जितना किसी इंसान का। लेकिन शुरुआत से ही इंसान अपने स्वार्थ के लिए जानवरों और पक्षियों को नुकसान पहुंचाता आया है। मकर सक्रांति के दिन भी ऐसा ही कुछ हुआ। इस दिन कई शहरों में जमकर पतंगबाज़ी हुई। मगर इस पतंगबाज़ी का ख़ामियाज़ा कई पक्षियों को अपनी जान गंवा कर भरना पड़ा। कारण बना चाइनीज मंझा। ऐसी ही एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।

इस मार्मिक तस्वीर में एक मृत तोता है, जिसकी गर्दन किसी पतंग के मांझे में फंस गई थी और उसने तोते की जान ले ली। इस तस्वीर को देखकर किसी की आंखों में आंसू आ जाएं। इसे एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा- 'हमारे सिर शर्म से झुके हैं। पक्षियों की दुर्दशा दिखाती इस फ़ोटो को शेयर करने के लिए धन्यवाद भाविक ठाकेर। दुर्भाग्य से पतंगों के इस त्यौहार के दिन सैंकड़ों पक्षी अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। चाइनीज़ मांझा इस्तेमाल करना बंद करें।



चीन से आयातित इस मांझे को सुप्रीम कोर्ट बैन कर चुका है। क्योंकि कांच चढ़ा ये मांझा पक्षियों की नहीं कई इंसानों की भी जान ले चुका है। The Hindu की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसी मकर संक्रांति को इस ख़तरनाक मांझे की चपेट में आकर नासिक में 18 पक्षी मारे गए और 40 घायल हो गए। गुजरात में पहले दिन 472 और अगले दिन 230 घायल पक्षियों को एक चैरिटेबल ट्रस्ट में घायल अवस्था में भर्ती कराया गया। वहीं जयपुर में तकरीबन 300 लोग इस मांझे के चलते घायल हो गए, जिनमें बाइकर्स और बच्चे भी शामिल हैं।

ये सारे उदाहरण बताते हैं कि चाइनीज़ मांझा कितना ख़तरनाक है। अभी 10 फरवरी को बसंत पंचमी आ रही है पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इस दिन सुबह से शाम तक असमान पतंगों से भरा रहता है। इसलिए इस तरह के जानलेवा मांझे का इस्तेमाल करना हम बंद कर दें। ये पक्षियों के साथ ही हमारे लिए भी अच्छा होगा। आपका क्या कहना है? कमेंट कर आप अपनी राय हमसे ज़रूर शेयर करें।