संतोष ठाकुर

जगदलपुर। अस्तित्व खोती बस्तर की जीवनदायिनी नदी इंद्रावती के संरक्षण और संवर्धन के लिए बस्तर की जनता ने आज एक एतिहासिक शुरूवात की । दंडक दल के सदस्यों के साथ बस्तर की कई सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संस्थाओं ने मिलकर सांकेतिक जल सत्याग्रह का आयोजन किया । लोगों ने आधे घंटे तक पानी में मौजूद रहकर इंद्रावती के संरक्षण के लिए नारे लगाए और जोरा नाला मुद्दे पर निर्णायक पहल की अपील की ।

      ग्रीष्म ऋतु के शुरूवात में ही इंद्रावती नदी के सूखने की स्थित से चिंतित बस्तर की जनता ने सांस्कृतिक और पर्यटन संवर्धन की संस्था दंडक दल की अगुवाई में आज सुबह जगदलपुर स्थित पुराने पुल के समीप सांकेतिक जल प्रदर्शन किया । बड़ी संख्या में मौजूद जनसमूह ने नदी के जल में खड़े रहकर इंद्रावती के संरक्षण और संवर्धन की आवाज़ बुलंद की । इंद्रावती बचाओ के नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने जोरा नाला विवाद के लिये निर्णायक क़दम उठाने कि अपील हुक्मरानो से की ।

दंडक दल के संस्थापक सदस्य अविनाश प्रसाद ने जानकारी देते हुवे बताया कि यह शुरूवाती आयोजन है और आवश्यकता पड़ने पर इंद्रावती नदी के लिए व्यापक आंदोलन किए जाएँगे । संस्था के हेमंत कश्यप ने कहा की इंद्रावती बस्तर ही नही बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की गौरव है और हर हाल में इसके अस्तित्व की लड़ायी जारी रहेगी ।

बस्तर चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष किशोर पारख ने इन्द्रावती नदी के गिरते जलस्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि-आज का आन्दोलन जनजागरण अभियान है। पारख ने कहा कि बस्तर वासियों ने वर्षो से इन्द्रावती के पानी के लिए वर्षो से संघर्ष किया है।

उन्होंने आगे कहा कि इन्द्रावती नदी का उद्गम ओडिशा में जरुर है पर इस नदी का 90 प्रतिशत हिस्सा बस्तर में है जिसपर सैकड़ो गाँव और हजारों लोग आश्रित है उन सभी लोगो के सामने जल संकट आ गया है जिसका तुरंत समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति भयावह होने की बात कही और राज्य सरकार इस समस्या का स्थाई समाधान करना चाहिए और बस्तर के हिस्से का पचास प्रतिशत जल हर मौसम में मिलना चाहिए न की ओडिशा को देना चाहिए।

वहीँ जगदलपुर नगर निगम के महापौर जतिन जायसवाल ने इन्द्रावती नदी के गिरते हुए जलस्तर को दयनीय करार दिया। महापौर ने कहा कि कई सालो से तत्कालीन सरकारे इस समस्या के समाधान के लिये प्रयासरत थे पर कोई सफलता नहीं मिली। बीते दिनों इंटेकवेल का जलस्तर गिर जाना भी चिंताजनक है क्योकि चित्रोकोट छत्तीसगढ़ का पर्यटनस्थल है जहाँ लोगो दूर-दूर से चित्रकोट जलप्रपात देखने आते है।

आयोजन में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज, अखिल भारतीय हल्बा समाज, बस्तर चेंबर ओफ कामर्स, किसान संघ, अग्नि, पतंजलि योग समिति, बस्तर प्रकृति बचाओ समिति समेत अन्य संस्थाओं के लोग मौजूद रहे ।