गौरव श्रीवास्तव
कांकेर।  जिले के धुर नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा से परतापुर सड़क का कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, नक्सलियो का कोर इलाका कहे जाने वाले इस इलाके में सड़क निर्माण का कार्य प्रशासन और पुलिस के लिए बहुत बडी चुनौती थी, लेकिन अब यह सड़क बहुत जल्द अपना अंतिम रूप ले लेगी और इस इलाके में भी विकास की बहार नजर आने लगेगी।
कोयलीबेड़ा से परतापुर सड़क के पूर्ण होने से पखांजुर से कोयलीबेड़ा की दूरी करीब 40 किलोमीटर कम हो जाएगी।  कोयलीबेड़ा से पखांजुर जाने के लिए अन्तागढ़ ब्लॉक से होकर गुजरना पड़ता था, लेकिन अब यह दूरी मिटने वाली है।
परतापुर से जब सड़क निर्माण का कार्य शुरू हुआ तब महला में बीएसएफ कैम्प बैठाया गया था, नक्सलियो के कैम्प खुलने के बाद कई बार जवानों को निशाना बनाया, इस सड़क के लिए बीएसएफ के 8 जवानों ने अपनी शहादत दी। फिलहाल 31 किलोमीटर के इस सड़क के लिए 3 बीएसएफ कैम्प महला, कटगांव और कामतेडा में बनाये गए है, जवानों की देखरेख में यह सड़क अपना अंतिम रूप लेने वाली है। इस सड़क पर 3 बड़े पूल बनने थे जिसमें एक पूल का काम पूर्ण हो चुका है, वही दो पूल का काम तेजी से चल रहा है। वही 75 छोटे पूल इस मार्ग पर बनने थे जिसमें से 60 से अधिक पूल का काम पूर्ण हो चुका है। इस सड़क के बनने से जिले के बेहद पिछड़े हुए माने जाने वाले इन इलाकों में विकास की गति में तेजी लायी जा सकेगी , सड़क को ही विकास की पहली डगर माना जाता है, ऐसे में पुलिस ,सुरक्षाबल और प्रशासन ने वो काम कर दिया है, जिसकी संभवनाएं कभी ना के बराबर नजर आती थी।
एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि यह मार्ग बहुत जल्द पूरा हो जाएगा, इस मार्ग से आवाजाही भी शुरू हो चुकी है। इस मार्ग ने बनने से नक्सलियो की पैठ भी इस इलाके में कमजोर होगी।