नई दिल्ली तमिलनाडु के अलियर स्थित सामुदायिक सेवा केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक होने का दावा करने वाले कनक जग्थाला कृष्णन ने अपने सिद्धांतों को स्टीफेन हाकिंग दुनिया के अन्य बड़े शोधकर्ताओं के साथ साझा करने का दावा किया है। गुरुत्वाकर्षण शक्ति वह नहीं है जो हम समझ रहे हैं कृष्णन ने आगे कहा कि यदि एक बार गुरुत्वाकर्षण के बारे में लोगों के बीच विचार बदल जाता है और उनके सिद्धांतों को स्वीकार कर लिया जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण तरंगों को नरेंद्र मोदी तरंगों के रूप में जाना जाएगा गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव को हर्षवर्धन प्रभाव के रूप में जाना जाएगा।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य मैं विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन मिसाइल मैन अब्दुल कलाम से बड़े वैज्ञानिक बनेंगे।



कृष्णन ने यह दावा पंजाब के जालंधर में 168वीं विज्ञान कांग्रेस के आयोजन में किया। आयोजन के दूसरे दिन शुक्रवार 4 दिसंबर को भारतीय वैज्ञानिक कनक जगथाला कृष्णन को आइंस्टीन के सिद्धांत पर चर्चा के लिए बुलाया गया। यहां उन्होंने सनसनीखेज दावा किया कि न्यूटन और आइंस्टीन गलत थे, साथ ही कहा कि भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन भारत के मिसाइल मैन ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से बड़े वैज्ञानिक बनेंगे। कृष्णन करते हैं। कृष्णन ने कहा एक बार जैसे ही मेरे से सिद्धांत  साबित हो गए भौतिकी के बारे में अभी लोग जो समझ रहे हैं, वह गलत साबित हो जाएगा। कृष्णन ने धरती के गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव और जलवायु परिवर्तन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा यदि गुरुत्वाकर्षण जैसी कोई शक्ति है तो ग्लेशियर से पिघल कर आने वाली पानी धरती द्वारा अंदर क्यों नहीं खिंची चली जाती। यह मैदानी इलाकों में क्यों जा रहा है?  

कृष्णन ने बताया न्यूटन को अल्पज्ञानी

कृष्णन ने सर आइज़क न्यूटन के बारे में कहा कि उनके पास गुरुत्वाकर्षण की शक्तियों के बारे में काफी कम समझ थी। उन्होंने कहा कि न्यूटन गुरुत्वाकर्षण की प्रतिकारक शक्ति को समझने में सक्षम नहीं थे। यही वजह है कि वह इससे संबंधित ज्यादा सवाल के जवाब नहीं दे सके। यही वजह है कि इससे संबंधित सवालों के जवाब नहीं दे सकें। भौतिकी को लेकर सिर्फ न्यूटन ही अल्पज्ञानी नहीं थे बल्कि आइन्स्टीन ने भी भौतिकी की सापेक्षता को लेकर दुनिया को गुमराह किया है। उनकी गणना सही थी, लेकिन उनके सिद्धांतों में समस्या थी। मैं इन सभी सिद्धांतों को हल करने में सक्षम रहा हूं। भारतीय वैज्ञानिक ने कहा कि अंतरिक्ष की स्व-संकुचित वजह से चीजें विशेष गति से चलती है। उन्होंने कहा अंतरिक्ष सूर्य व अन्य सभी ग्रहों से भारी है और सभी ग्रह को दबाता है उनके ऊपर बराबर का दबाव बनाया जाता है। इस वजह से वह घूमते हैं अंतरिक्ष के स्व-संकुचित प्रकृति को न्यूटन और आइन्स्टीन नहीं समझ सके। आइन्स्टीन ने दुनिया के लोगों को सही राह नहीं दिखाई।