तनवीर कुरैशी, जशपुरनगर | कलेक्टर महादेव कावरे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा के बाद बताया है की शासकीय नवीन आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हिन्दी माध्यम में कक्षा छठवीं, कक्षा नवमी, कक्षा ग्यारहवीं में पढऩे वाले विद्यार्थियों को उसी स्कूल में ही पढऩे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पालकों को अब बच्चों को पढ़ाई के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है जिला प्रशासन द्वारा बच्चों के भविष्य को देखते हुए निर्णय लिया गया है।

यह था मामला ?

जिला मुख्यालय में नगर पालिका के पास स्थिति नवीन आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल को प्रदेश सरकार के द्वारा इंग्लिश मीडियम स्कूल बनाया जा रहा है। इसके लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है है। स्कूल कैम्पस और भवनों को दुलहन की तरह सजाया जा रहा है। यहां इंग्लिश मीडियम में पढऩे वाले बच्चों का एडमिशन भी कर लिया गया है। लेकिन सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना से उन बच्चों का भविष्य खतरे में आगया था, जो यहाँ बचपन से पढ़ाई करते आ रहे थे. अब इंग्लिश मीडियम वाले स्कूल में हिन्दी वाले पुराने विद्यार्थियों को स्कूल से निकाल दिया गया था, और उन्हें उनके हाथों में स्थानांतरण पत्र यह कहकर थमा दिया गया कि आप अपने पसंद के स्कूल का चुनाव कर वहां दाखिला करा लीजिये।

यह थी पालकों की मांग

9 सितंबर को प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. शुक्ला स्कूल का निरिक्षण करने आये, यहाँ पत्रकारों से चर्चा के दौरान स्कूली शिक्षा सचिव डॉ. आलोक शुक्ला से बीजेपी नेता व पूर्व पार्षद इम्तियाज अंसारी ने इस विषय पर बात की थी. परिजनों की बात रखते हुए उन्होंने कहा था कि यह स्कूल 1932 से संचालित है, इसमें आसपास के दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्य समुदाय के अधिकांश बच्चे शिक्षा हासिल कर चुके हैं और अभी भी करते हैं। पास में स्कूल होने की वजह से वे समय पर पढ़ाई भी कर लेते हैं और परिवार का पालन-पोषण के लिए काम भी कर लेते हैं, लेकिन अब उन्हें कहीं और स्कूल जाना होगा, स्कूल दूर होने की वजह से अब न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी बल्कि वे शिक्षा से भी वंचित हो जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को इसी स्कूल में एडमिशन देने की मांग रखी। उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए डॉ. शुक्ला ने ज्ञापन लिया और विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।

कलेक्टर ने क्या कहा ?

पूरे मामले पर जशपुर कलेक्टर महादेव कावरे ने कहा की पालकों की मांग पर विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हिंदी के कक्षा 6वीं, 9वीं और 11वीं के बच्चों को भी उसी संस्थान में पढऩे के लिए एडमिशन देने का निर्णय लिया गया है।