रायपुर । कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को एक पत्र भेजा है। जिसमें स्पष्ट रूप से आगाह किया गया है कि यदि सरकार ने किसी भी दबाव में आकर ई-कॉमर्स पर एफडीआई पॉलिसी को लागू करने की तारीख 1 फरवरी से आगे बढ़ाया या स्थगित किया, तो सरकार के इस फैसले के देश के 7 करोड़ व्यापारी एक राष्ट्रीय अभियान छेड़ देंगे। व्यापारियों ने ई-कॉमर्स कम्पनियों को समय देने की बजाय उन पर कार्रवाई करने की मांग की है।

कैट के पदाधिकारियों का कहना है कि यह मामला अब छोटे व्यापारियों और बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच का है और देखना है कि सरकार किसका पक्ष लेती है। देश में लगभग 7 करोड़ व्यापारी हैं जो लगभग 30 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं और देश का रिटेल व्यापार प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का है, जिस पर कब्ज़ा जमाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने ई-कॉमर्स का रास्ता चुना है।



ई-कॉमर्स कंपनियों ने कहा है कि उन्हें पालिसी समझने का कुछ और वक़्त चाहिए इसलिए उन्होंने पालिसी की अंतिम तारीख को आगे बढ़ाने का अनुरोध  किया है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया, राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी ने वाणिज्य मंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि –‘इस बात से यह साफ है की ये कंपनियां गत दो वर्षों से पालिसी का उल्लंघन कर रही थी और उनका सारा व्यापार केवल अस्वस्थ व्यापारिक नीतियों पर टिका था और ऐसे में उनके पालिसी उल्लंघन को ठीक करने के लिए सरकार उनको वक़्त दे जो कतई भी उचित नहीं होगा। इन कंपनियों ने गत दो वर्षों में पालिसी का उल्लंघन किया है उसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए और दोषी कंपनियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

यह जानकारी कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र दोषी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानन्द जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी ने पत्र लिखकर दी है।