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रायपुर। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दवाओं की नहीं, बल्कि अच्‍छे खान पान की जरूरत है। अत्‍याधुनिक जीवनशैली ने लोगों की दिनचर्या को इसके विपरीत कर दिया है। लोग स्‍वस्‍थ रहने के लिए खान पान पर नहीं, बल्कि दवाओं पर निर्भर हैं। जबकि दवाओं के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और ज्‍यादा कमजोर हो जाती है। यह कहना है अप्रोप्रिएट डाइट थैरेपी के डायरेक्‍टर डा. एस कुमार का।

 

The Voices के साथ एक बातचीत में उन्‍होंने बताया कि मनुष्य का जन्‍म भोजन से होता है। डाइट पर रिसर्च के लिए गोल्‍ड मेडल से नवाजे गए डा कुमार का कहना है कि भारत में भोजन इमोशनल, कल्‍चरल और ट्रैडिशनल है। जबकि शरीर वैज्ञानिक आधार पर काम करता है। इसके लिए जरूरी है कि खान पान भी वैज्ञानिक आधार पर हो।

उन्‍होंने बताया कि बॉडी में तीन चीजें, जैसे पीएच, तापमान और हयुमिडिटी पहले से निर्धारित है। भोजन के तौर पर हम ज्‍यादातर अम्‍लीय पदार्थ जैसे दूध, नमक, सोयाबीन, तेल आदि खाते हैं। इससे शरीर डैमेज होता है।

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