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नई दिल्ली दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का निधन हो गया है। 81 साल की शीला दीक्षित ने दिल्ली के फोर्टिस एस्कार्ट्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। कुछ समय पहले बीबीसी न्यूज़ ने उनके जीवन पर आधारित कुछ घटनाओं के बारे में एक स्टोरी पब्लिश की थी, जिसमें बताया गया है कि शीला दीक्षित 15 साल की उम्र में तात्कालिक प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु से मिलने पैदल ही चलते हुए 'तीनमूर्ति भवन' पहुंच गईं थी। आई जानते हैं उनकी जिन्दगी से जुड़ी ऐसी ही कुछ  कुछ रोचक बातें :-

एक दिन 15 साल की बच्ची शीला कपूर ने तय किया कि वो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने उनके 'तीनमूर्ति' वाले निवास पर जाएंगी। वो 'डूप्ले लेन' के अपने घर से निकली और पैदल ही चलते हुए 'तीनमूर्ति भवन' पहुंच गईं। गेट पर खड़े एकमात्र दरबान ने उनसे पूछा, आप किससे मिलने अंदर जा रही हैं? शीला ने जवाब दिया 'पंडितजी से'। उन्हें अंदर जाने दिया गया, उसी समय जवाहर लाल नेहरू अपनी सफ़ेद 'एंबेसडर' कार पर सवार हो कर अपने निवास के गेट से बाहर निकल रहे थे। शीला ने उन्हें 'वेव' किया। उन्होंने भी हाथ हिला कर उनका जवाब दिया।

ऐसे मिला उन्हें जीवनसाथी

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास की पढ़ाई करने के दौरान शीला की मुलाकात विनोद दीक्षित से हुई जो उस समय कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के इकलौते बेटे थे। शीला याद करती हैं, ‘हम इतिहास की 'एमए' क्लास में साथ साथ थे। मुझे वो कुछ ज्यादा अच्छे नहीं लगे। मुझे लगा ये पता नहीं वो अपने-आप को क्या समझते हैं। थोड़ा अक्खड़पन था उनके स्वभाव में।’

उन्होंने बताया, "एक बार हमारे कॉमन दोस्तों में आपस में ग़लतफ़हमी हो गई और उन्होंने मामले को सुलझाने के लिए हम-दूसरे के नज़दीक ज़रूर आ गए।'' विनोद अक्सर शीला के साथ बस पर बैठ कर फ़िरोज़ शाह रोड जाया करते थे, ताकि वो उनके साथ अधिक से अधिक समय बिता सकें।

जब ख़ुशी से नाच उठी शीला दीक्षित

शीला बताती हैं, 'हम दोनों डीटीसी की 10 नंबर बस में बैठे हुए थे। अचानक चांदनी चौक के सामने विनोद ने मुझसे कहा, मैं अपनी माँ से कहने जा रहा हूँ कि मुझे वो लड़की मिल गई है जिससे मुझे शादी करनी है। मैंने उनसे पूछा, क्या तुमने लड़की से इस बारे में बात की है? विनोद ने जवाब दिया, 'नहीं, लेकिन वो लड़की इस समय मेरी बग़ल में बैठी हुई है।' शीला ने कहा, 'मैं ये सुनकर अवाक् रह गई। उस समय तो कुछ नहीं बोली, लेकिन घर आ कर खुशी में ख़ूब नाची। मैंने उस समय इस बारे में अपने माँ-बाप को कुछ नहीं बताया, क्योंकि वो ज़रूर पूछते कि लड़का करता क्या है? मैं उनसे क्या बताती कि विनोद तो अभी पढ़ रहे हैं।'

शीला बताती हैं, 'मैं रात में ही भारी बरसात के बीच विनोद को अपनी कार में बैठा कर 80 किलोमीटर दूर कानपुर ले आई। वो अलीगढ़ वाली ट्रेन पर चढ़ गए। जब मैं स्टेशन के बाहर आई तो मुझे कानपुर की सड़कों का रास्ता नहीं पता था।’ उस वक़्त रात के डेढ़ बजे थे। शीला ने कुछ लोगों से लखनऊ जाने का रास्ता पूछा, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। सड़क पर खड़े कुछ मनचले उन्हें देख कर किशोर कुमार का वो मशहूर गाना गाने लगे, ' एक लड़की भीगी भीगी सी।'

जब ससुर ने किया बाथरूम में बंद

इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कोलकाता से जिस विमान से राजीव गाँधी दिल्ली आए थे, उस में बाद में भारत के राष्ट्रपति बने प्रणब मुखर्जी के साथ साथ शीला दीक्षित भी सवार थी। शीला बताती हैं, "इंदिराजी की हत्या की सबसे पहले ख़बर मेरे ससुर उमा शंकर दीक्षित को मिली थी, जो उस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। जैसे ही विंसेंट जार्ज के एक फ़ोन से उन्हें इसका पता चला, उन्होंने मुझे एक बाथरूम में ले जा कर दरवाज़ा बंद किया और कहा कि मैं किसी को इसके बारे में न बताऊँ।''

जब शीला दिल्ली जाने वाले जहाज़ में बैठीं तो राजीव गाँधी को भी इसके बारे में पता नहीं था. 2:30 बजे वो कॉकपिट में गए और बाहर आकर बोले कि इंदिराजी नहीं रहीं।' शीला दीक्षित आगे बताती हैं, ''हम सब लोग विमान के पिछले हिस्से में चले गए। राजीव ने पूछा कि ऐसी परिस्थितियों में क्या करने का प्रावधान है? प्रणब मुखर्जी ने जवाब दिया, पहले भी ऐसे हालात हुए हैं। तब वरिष्ठतम मंत्री को अंतरिम प्रधानमंत्री बना कर बाद में प्रधानमंत्री का विधिवत चुनाव हुआ है।'

इसलिए हार गईं अरविन्द केजरीवाल से

15 वर्षों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहने के बाद शीला दीक्षित वर्ष 2013 का विधानसभा चुनाव हार गईं। जब उनसे पूछा गया कि इसके पीछे वजह क्या थी, शीला दीक्षित का जवाब था।' केजरीवालजी ने जो बहुत सारी चीज़ें कह दीं कि 'फ़्री' पानी दे दूंगा। 'फ़्री' बिजली दे दूंगा, इसका बहुत असर हुआ। लोग उनकी बातों में आ गए। दूसरा जितनी गंभीरता से हमें उन्हें लेना चाहिए था, उतनी गंभीरता से हमने उन्हें नहीं लिया।''

रायपुर
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रायपुर।  प्रदेश में मध्यान्ह भोजन में अंडे के वितरण को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसे लेकर विपक्ष भी सरकार पर जमकर निशाना साध रहा है। इसी कड़ी में भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार की चुटकी लेते हुए कहा कि- सावन के महीने में सरकार द्वारा स्कूल में बच्चों को अंडा बांटने से भगवान नाराज हो गए हैं, इसलिए ही प्रदेश में बारिश नहीं हो रही।

दरअसल छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के दौरान शुक्रवार को फिर से राज्य के स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार के साथ अंडा देने की बात को लेकर चर्चा छिड़ी। सरकार ने स्कूलों में हफ्ते में तीन दिन बच्चों को अंडे देने का प्रस्ताव तैयार किया था।

सरकार ने इसके बाद स्पष्ट किया कि जो बच्चे अंडा नहीं खाना चाहते उन्हें उसके बदले पूरक पोषक आहार दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पर विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, सावन के महीने में सरकार द्वारा स्कूल में बच्चों को अंडा बांटने से भगवान नाराज हो गए हैं, इसलिए ही प्रदेश में बारिश नहीं हो रही। बृजमोहन की इस टिप्पणी के साथ ही सदन में ठहाके गूंज उठे। इसके बाद कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानूसन विलंब से आया।

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