जांजगीर । पिहरिद गांव के बोरवेल में 10 साल के राहुल को गिरे हुए 70 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। वो अब तक बाहर नहीं आ सका है। रेस्क्यू टीम लगातार राहुल को रस्सी के सहारे फल भेज रही है सुबह उसने केला भी खाया है। 



CMO की तरफ से किया गया ट्वीट सबकी दुआओं में शामिल है राहुल, राहुल के बचाव अभियान में अब गांव पिहरिद का हर नागरिक जुड़ गया है। आम लोग गांव में लगे सभी हैण्डपम्प से पानी निकाल रहे जिससे कि बोरवेल में पानी का स्तर कम रहे। राहुल के बचाव अभियान में हर वर्ग की प्रार्थना शामिल है।
अलर्ट मोड पर प्रशासन उम्मीद की जा रही है, जल्द ही राहुल अब बाहर आ जाए। रेस्कयू स्थल पर मेडिकल स्टाफ पूरी तैयारी के साथ अलर्ट मोड पर है। ऑक्सीजन, मास्क के साथ स्ट्रेचर की है व्यवस्था। एम्बुलेंस भी तैयार है।  मेडिकल स्टाफ की कोशिश होगी जब राहुल को बाहर निकाला जाएगा तो स्वास्थ्य जांच करते हुए एम्बुलेंस में ही सम्पूर्ण चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए अपोलो अस्पताल बिलासपुर तक सुरक्षित पहुचाया जाए।

इस वजह से आ रही परेशानी रेस्क्यू का काम कर रही टीम को कई तरह के रिस्क का सामना करना पड़ रहा है। बीच में चट्‌टान की वजह से रेस्क्यू टीम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। बड़ी ड्रिल मशीन का उपयोग भी नहीं किया जा रहा, क्योंकि इससे आसपास कंपन हो सकती है। बाकी का काम छोटी ड्रिल मशीन और हाथ के खुदाई के जरिए किया जा रहा था, लेकिन छोटी मशीन से भी परेशानी हो रही है। इसलिए बिलासपुर से ऐसी मशीन को बुलाया गया है, जो आकार में थोड़ी छोटी है। अब इसी मशीन से टनल बनाई जा रही है। 
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसा राहुल अब सिर्फ 3 फीट दूर रह गया है। राहुल तक पहुंचने के लिए टनल बनाने का काम जारी है। बीच-बीच में चट्‌टान बाधा बन रही है। इसे देखते हुए बिलासपुर से मशीन मंगवाई गई है। हालांकि राहुल की सुरक्षा और मिट्‌टी धसकने के डर को देखते हुए काम की स्पीड कम है। इधर, एक बार फिर से रस्सी लेकर भी NDRF बच्चे को निकालने के प्रयास में है। बीच में खबर थी कि राहुल की हलचल कम हो गई है, लेकिन प्रशासन ने कहा है कि हम बच्चे को देख पा रहे हैं, वह सांस ले रहा है।

जरा सी चूक कब किसी को मुसीबत में डाल दे, यह कहा नहीं जा सकता। आज जांजगीर-चाम्पा जिले का यह गाँव पिहरीद देश भर में सुर्खियों में है। यहाँ रहने वाले लाला साहू पेशे से किसान है और घर पर ही टेंट हाउस के साथ डीजे का व्यवसाय भी करते हैं। इन्होंने अपने घर के पीछे अपनी जमीन पर बोर कराई थी। बोर में पानी नहीं निकल पाने की वजह से पास ही एक दूसरा बोर भी कराया था। लाला साहू ने वह बोर जिसमें पानी नहीं निकला,उस बोर को पूरी तरह से शायद ढका नहीं! बोर खुला हुआ था। इनके घर में दो बच्चे भी है। एक राहुल, दूसरा ऋषभ। राहुल 11 साल का है और ऋषभ 8 साल का। घर के पीछे बहुत बड़ी खुली जगह भी है। जहाँ राहुल,ऋषभ और अन्य बच्चे खेलते हैं। बताया जा रहा है कि 10 जून को अचानक ही एक घटना घट गई। दोपहर में खेलते हुए राहुल बोर में नीचे जा गिरा। जैसे ही यह बात परिजनों तक पहुँची। हंगामा सा मच गया। राहुल खुले हुए बोर में लगभग 60 फीट नीचे गिरकर फस गया। आनन-फानन गॉंव में यह खबर आग की तरह फैल गई और सहायता के लिए सभी ने पुलिस प्रशासन तक बात पहुचा कर मदद मांगी।


राहुल साहू (10) का शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद से कुछ पता नहीं चला। जब घर के ही कुछ लोग बाड़ी की तरफ गए तो राहुल के रोने की आवाज आ रही थी। गड्‌ढे के पास जाकर देखने पर पता चला कि आवाज अंदर से आ रही है। बोरवेल का गड्‌ढा 80 फीट गहरा है। ये भी बताया गया है कि बच्चा मूक-बधिर है, मानसिक रूप से काफी कमजोर है। जिसके कारण वह स्कूल भी नहीं जाता था। घर पर ही रहता था। पूरे गांव के लोग भी 2 दिन से उसी जगह पर टिके हुए हैं, जहां पर बच्चा गिरा है। राहुल अपने मां-बाप का बड़ा बेटा है। उसका छोटा भाई 2 साल छोटा है। पिता की गांव में बर्तन की दुकान है।