नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ी सौगात देते हुए रेपो रेट घटा दिया है। इसके बाद होम लोन के साथ ही ऑटो लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं। रेपो रेट को 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसदी किया गया है, यानी इसमें 25 आधार अंकों की कटौती की गई है। रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसमें कमी होने से बैंकों को कम ब्याज देना पड़ता है। बैंकों का ब्याज कम होने का फायदा आखिकर आम लोगों को होता है। जानते हैं इस कदम का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा

1 होम लोन कम होगा

रेपो रेट में कटौती से होम लोन रेट में कटौती हो सकती है। होम लोन रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट्स की कटौती से 20 साल की समयसीमा वाले 10 लाख रुपए के लोन पर ईएमआई में प्रतिमाह करीब 168.40 रुपयों की कमी आ सकती है।

2 आर्थिक विकास दर होगी तेज



उपभोक्‍ताओं के ज्यादा खर्च के साथ ही कॉर्पोरेट्स और कन्जयूमर्स के लिए लोन की सुलभता की वजह से आर्थिक विकास दर तेज होने की संभावना है। ऐसा होने पर रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।

3 बैंकों और कॉर्पोरेट्स को फायदा

बॉन्ड पोर्टफोलियों की वैल्यू बढ़ जाने से बैंकों को फायदा होगा। ब्याज दर कम होने से वित्तीय कंपनियों में मजबूती आएगी। लोन सस्ता होने से कॉर्पोरेट्स को कर्ज भुगतान में सुविधा मिलेगी। उनकी ब्‍याजदर कम होगी, जिससे वे अधिक निवेश कर रोजगार सृजन में भागीदार बन सकते हैं।

4 कंपनियों की बढ़ेगी इक्विटी

मार्केट के बदले माहौल में कंपनियां इक्विटी बढ़ा सकेंगी, सरकार के विनिवेश की प्रक्रिया की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

5 सरकार भी यही चाहती थी

भाजपा ने वर्ष 2014 के अपने चुनावी घोषणा में यह वादा किया था कि वह होम लोन व अन्य कर्जे की दरों को कम करेगी। वहीं एसबीआई की आर्थिक शोध इकाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया था कि आरबीआई ब्याज दरों को घटाने के लिए रेपो रेट में 0.25 की कटौती कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स कह चुकी है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और महंगाई की दर में भारी गिरावट को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनती है। कटौती की उम्मीद इसलिए भी बढ़ गई थी कि अभी महंगाई में कुछ और वृद्धि होगी, तब भी यह आरबीआई के लक्ष्य से नीचे ही रहेगी।

आरबीआई ने पिछले साल दिसंबर में समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में कटौती तो नहीं की थी लेकिन यह आश्वासन दिया था कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो आगे इस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं। उसके बाद सरकार की तरफ से आए आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर में थोक महंगाई की दर 2.19 फीसदी रही थी जो पिछले डेढ़ वर्षों का न्यूनतम स्तर था।