पहले जिनके जेहन से उरी अटैक की यादें कमजोर पड़ गई हैं उनके लिए :

18 सितम्बर 2016 को सुबह साढ़े 5 बजे जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर हमला हुआ। निहत्थे और सोते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इसके बाद आतंकवादियों ने बटालियन हेडक्वार्टर के फ्यूल डिपो में ढेरों ग्रेनेड फेंककर आग लगा दी थी। इससे लगभग सौ मीटर के दायरे में भीषण आग लग गई और 18 सैनिकों की जान चली गई।

बदला लेना भी जरूरी होता है क्योंकि- "अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च।।"

यदि अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है।

 

कहानी- फिल्म की शुरूअात होती है अंधेरे में चीते सी चमचमाती हरी आंखों वाले हमारे सैनिकों की ओर किए गए म्यांमार के ऑपरेशन हॉट परश्यूट से। उरी हमले से एक साल पहले मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादियों ने 4 जून, 2015 को भारतीय सेना के काफिले पर हमला कर दिया। उत्तर पूर्वी भारत में अब तक हुए इस सबसे भीषण हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। इसके जवाब में भारतीय सेना ने अपने खास दस्ते को म्यांमार सीमा के अंदर भेजकर इन उग्रवादियों की जड़ें हिला दी थीं। भारतीय सेना के इस मिशन को 'ऑपरेशन हॉट परश्यूट' का नाम दिया गया था। फिल्म में ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद मेजर विहान (विकी कौशल) के परिवार और फर्ज के बीच की कश्मकश को दिखाया गया है। और इसी सब के बीच एक अलसुबह हो जाता है- उरी अटैक। इसके बाद शुरू होता वो सब जो आपको बांधे रखता है।

 

एक्शन- सोते हुए निहत्थे सैनिकों के टेंट में घुसकर गोलीबारी का दृश्य के बाद भारतीय सैनिकों की ओर से उन आतंकियों को ढेर करने के बाद मेजर करन कश्यप (मोहित रैना- महादेव वाले ) का शहीद हो जाना दर्शक के मन में टीस पैदाकर जाता है। इस दृश्य को ऐसा फिल्माया गया है जिसमें मेजर करन और दर्शक दाेनों को पता चल जाता है कि अगले सेकेंड अब मौत होनी निश्चित है। उस अगले पल के नतीजे को भांपने के बाद पूरे थियेटर में जगह-जगह से "शिट", "ओह.. नो" जैसी प्रतिक्रियाएं आ रही थी। और फिर एक झटके में उनकी सोच सच हो जाती है। फिल्म की शुरूआत से लेकर आखिर तक गोलियों की बौछार से लेकर तमाम अटैक एकदम असल लगते हैं। शानदार एक्शन।

 

टेक्नोलॉजी- जिस तरह से फिल्म में दृश्यों को "ड्रोन एंगल" से बीच-बीच में शूट किया गया है, वो शानदार है।


अभिनय- अंतिम विदाई देते समय 8 साल की बेटी जब जोश में अपने शहीद पिता को सैल्यूट करती है तो सलामी परेड के अनुशासन में बंधे पैरा स्पेशल फोर्सेज़ के मेजर विहान की फफकती छाती पर थरथराते मेडल ही सब कुछ कह जाते हैं।

अजीत डोभाल के रूप में परेश रावल ने अच्छा काम किया है। बार-बार अपना मोबाइल तोड़कर दर्शकों के चेहरे पर हंसी भी ले आते हैं। पीएम मोदी और मनोहर पार्रिकर, जेटली को तो ठीक-ठाक दिखाया गया है, मगर राजनाथ खुद को फिल्म में देखकर शायद खुश न हों। यामी गौतम से लेकर विकी कौशल और मोहित रैना के साथ सभी ने अच्छा प्रयास किया है।

स्टार- 5 में से 4

क्यों देखें- अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं तो जरूर देखिए। कुछ जरूरी काम होने के कारण नहीं जा पा रहे हैं तो उसे निपटाकर देख आइए। जाे फिल्मों का ज्यादा शौकीन न हो वो भी देख आए। अपने जवानों की मौतों के बदला लेने के दृश्य आपको विचलित नहीं करेंगे। संतोष ही देंगे।

( साभार- पत्रकार अभिषेक तिवारी के ब्लॉग Review: URI The Surgical Strike (उरी) से)