हितेश शर्मा

दुर्ग। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने देश में कैंसर के बढ़ते मरीजो को ध्यान में रखते हुए  2 साल पहले जर्दा युक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगया था। आज 2 साल बाद भी इस आदेश का असर दुर्ग जिले में दिखाई नही दे रहा है। शहर की हर पान दुकान और किराना दुकानो में धड़ल्ले से जर्दा युक्त मौत का यह सामान खुलेआम 10 रुपये में बिक रहा है। 

कोर्ट के आदेश के बाद इस पर 'Tobacco is injurious to health' मतलब तंबाकू स्वास्थ्य के लिए  खतरनाक और कैंसर के लिये तंबाकू को उत्तरदायी बताया गया जाता है। इसके बावजूद लोग इसे धड़ल्ले से खा रहे हैं। खास बात यह है कि इसकी बिक्री कोर्ट परिसर रेलवे स्टेशन और बस स्टेंड के आसपास भी खुले आम हो रही है। 

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जब हमने जर्दा युक्त गुटका की पड़ताल की तो कुछ तथ्य हमारे सामने आए हमने एक पान कि दुकान पर गुटखा मांगा 10 रुपए के पाउच के साथ एक छोटा सुगंधित तंबाखू का पाउच बिना मांगे ही दुकानदार ने दे दिया इस संबंध में जब हमने दुकानदार से पूछा तो उसने कहा कि आप जर्दा गुटखा मांगेंगे तो वह भी मिल जाएगा। हालात तो यही दिखा रहे हैं कि जिले में दो साल बाद भी जर्दा गुटखा पर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। अवैध जर्दा युक्त की गुटका की बिक्री लगातार जारी है। 

बिक्री कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही 

आपको बता दे कि देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी जर्दा युक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं प्रतिबन्ध के बाद भी गुटखा की बिक्री कम नहीं हुई बल्कि बढ़ती ही जा रही है। बहरहाल गौर करने वाली बात ये है कि जब गुटखा पर प्रतिबंध लगा हुआ हैं तो तो फिर ये गुटका आ कहा से रहा है। पान की दुकानों में सप्लाई कैसे ओर किस साधन से की जा रही है, ये बड़ा सवाल है।