नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया। उन्होंने कहा कि आज का प्रस्ताव और बिल भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा, यह महान सदन इस पर विचार करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सोमवार को एक संवैधानिक आदेश जारी किया है जिसके तहत भारत के संविधान के सारे अनुबंध जम्मू कश्मीर में लागू होंगे। वहीं जम्मू कश्मीर को मिलने वाले विशेष अधिकार भी नहीं रहेंगे और मैं आज इस सदन में पुनर्गठन का बिल भी लेकर आया हूं।

केन्द्रीय गृह मंत्रीशाह ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, कश्मीर पर संसद ही सर्वोच्च है। कश्मीर को लेकर नियम कानून और संविधान में बदलाव से कोई नहीं रोक सकता। रही बात कश्मीर की तो जब मैं जम्मू कश्मीर कहता हूं तो उसमें पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन भी शामिल है। भारत का हिस्सा है कश्मीर, कश्मीर के लिए हम जान दे देंगे क्या बात करते हैं आप। क्या कांग्रेस पीओके को भारत का हिस्सा नहीं मानती है ?

शाह ने लोकसभा में बिल और प्रस्ताव पेश करने के बाद कहा- मैं यहां एक एक सदस्य की बात का जवाब देने के लिए तैयार हूं। मैं सबकी बात सुनूंगा और फिर जवाब दूंगा लेकिन इस पर चर्चा शांति से हो।

इससे पहले कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आपने रातों रात नियम तय किए, नियम तोड़े गए। इस पर शाह ने कहा कि इस बात को सामान्य तौर आरोप ना लगाएं, वो बताएं कि किस नियम का उल्लंघन हुआ है ? हालांकि चौधरी ये नहीं बता सके कि कौन सा नियम तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के लोग 1948 से वहां पर मॉनीटरिंग करते हैं, इस पर अमित शाह ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि क्या ये कांग्रेस का स्टैंड है ? क्या कांग्रेस मानती है कि संयुक्त राष्ट्र जम्मू कश्मीर की मॉनीटरिंग कर सकता है ?

बता दें कि सोमवार को जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के लिए राष्ट्रपति से मंजूरी मिली। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य होंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का प्रस्ताव पेश किया था। इस बीच राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ था। बहरहाल लोकसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है, इस बिल को पास होने में कोई दिक्कत नहीं होगी।