हेल्थ डेस्क।  इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो टाइप 2 डायबिटीज़ से या तो पीड़ित हैं , या फिर उन्हें यह बीमारी होने की संभावना है। ऐसे में कई बार लोग इन्हें सलाह देते दिखाई देते हैं कि मीठे में शहद का उपयोग करो। जबकि इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को दिनभर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का भी ध्यान रखना होता है। 

ऐसे में कोई भी मीठी वस्तु हो, तो उसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होगी। तो क्या शहद सही नहीं है, या कार्बोहाइड्रेट की मात्रा शहद में कम होगी। चलिए जानते हैं कि क्या टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज शहद का सेवन कर सकते हैं या नहीं।

​शहद में इतना कार्बोहाइड्रेट

आज के समय में शहद को लेकर मिलावट तो एक समस्या है ही साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी अधिक होती है। शहद की एक चम्मच में कैलोरी की संख्या 64 होती है और इसमें 17 ग्राम शुगर भी होती है। साथ ही शहद की एक चम्मच में 17 ग्राम कार्बोहाइड्रेट भी होता है। इसके अलावा शहद में बहुत सी विटामिन्स और खनिज पदार्थ होते हैं। लेकिन इनकी मात्रा बहुत कम होती है। ऐसे में अगर आप पोषक तत्वों के आधार पर शहद चुनने की सोच रहे हैं तो यह सही नहीं होगा।

​शहद और चीनी में महज इतना फर्क

वहीं, अगर बात करें चीनी की जगह शहद इस्तेमाल करने की, तो इन दोनों के लेकर किए गए टेस्ट को आपको समझाना होगा। एक बात तो तय है कि चीनी, शहद से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें किसी तरह के विटामिन्स या खनिज पदार्थ नहीं होते। पर इसका मतलब यह भी नहीं कि शहद का सेवन ठीक है। हाल ही में शहद के ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) जांचा गया तो पता चला कि शहद का जीआई स्कोर 58 था। वहीं चीनी का स्कोर 60 जीआई।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप चीनी का सेवन करते हैं तो यह आपके रक्त में शुगर के लेवल को बढ़ा देगी। जबकि शहद में इसकी रफ्तार थोड़ी कम होगी। लेकिन स्कोर के मुताबिक यह बहुत ही कम अंतर होगा। अगर आप इंसुलिन की दवाई या इलाज करा रहे हैं तो भी शहद आपके लिए सही विकल्प नहीं होगा। इसके बाद भी आप चाहें तो शहद का सेवन कर सकते हैं। पर कुछ चीजें ध्यान रखें, जैसे कि इसकी गुणवत्ता और इसकी मात्रा।

​क्या मधुमेह में शहद सही या नहीं?

मधुमेह से पीड़ित और इसे होने के जोखिम से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ हर उस खाद्य सामग्री को त्यागने की सलाह देते हैं, जिनमें शुगर का उपयोग किया गया। जबकि कुछ कहते हैं कि शहद का सेवन कम मात्रा में किया जा सकता है। लेकिन अगर आप इंसुलिन लेते हैं तो आपको अपने रोजाना की कार्बोहाइड्रेट की संख्या पर भी नजर रखनी होगी, ताकि आप यह तय कर सकें कि आपको किस मात्रा में इंसुलिन की खुराक लेना है।

टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को यह बात समझनी होगी कि उन्हें कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की मात्रा का खास ध्यान रखना होगा। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो इससे उनके खून में शुगर का लेवल बढ़ जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि आप शहद का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर और अन्य विशेषज्ञ की सलाह भी ले सकते हैं।

​क्या है विशेषज्ञों की राय

टाइप 2 डायबिटीज़ को लेकर सभी विशेषज्ञों की राय भी एक सी नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहद के अंदर एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेंटरी गुण होते हैं। यह गुण उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद हैं जिन्हें अक्सर सूजन की समस्या रहती है। हालांकि, इन तत्वों के लिए केवल शहद ही एक विकल्प नहीं है। इसके लिए अन्य खाद्य सामग्री का सेवन कर सकते हैं।

​रिसर्च के परिणाम

मधुमेह और शहद को लेकर बहुत से शोध हुए हैं, जिनमें से कुछ जानवरों पर किए गए हैं तो कुछ इंसानों पर। इन शोधों में बहुत से अलग परिणाम सामने आए हैं जो इस प्रकार हैं।

हाल ही में एक अध्ययन हुआ जिसमें 2 लोगों को 5 से 25 ग्राम तक शहद चार महीने तक दिया गया और पाया गया कि इनका हीमोग्लोबिन कम हो गया है। वहीं, कुछ अन्य लोगों को शहद की अधिक मात्रा दी गई। जिसके बाद इन लोगों को हीमोग्लोबिन बढ़ा हुआ पाया गया। लेकिन इस अध्ययन पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कुल 64 लोगों पर किया गया था, जिसमें से भी बहुत कम लोगों को शहद का डोज दिया गया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि शहद टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद है या नहीं।

इसके अलावा एक अन्य अध्ययन में 48 लोगों को शामिल किया गया। जिसमें से 8 लोगों को दिनभर में शहद की एक खुराक दी गई, वह भी 8 सप्ताह तक। जिनके परिणाम को देखकर भी आप शहद के सेवन का रुख करते हैं।

शहद और मधुमेह को लेकर हुए यह शोध इसी ओर इशारा करते हैं कि सीमित मात्रा में शहद का सेवन किया जा सकता है। हालांकि, अगर आप शहद का सेवन करना चाहते हैं तो आप केवल डॉक्टर की सलाह पर ही ऐसा करें।