सोनीपत। 'म्हारी छोरियां छोरों से कम ना से' इस बात को फिर एक बार चरितार्थ किया है, हरियाणा की सौम्या ने। यह पहली बार नहीं है की बेटियों ने देश का नाम रौशन किया है। कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जब बेटियां समाज की विभिन्न परिस्थितिओं से लड़ कर अपने हुनर को पहचान देती हैं।

अब बेटियां सिर्फ लाडली और बहुरानी के नाम से नहीं जानी जाती बल्कि एक पिता का सम्मान भी हैं। देखा जाये तो बेटियां अन्तरिक्ष पर जा रही हैं, एवरेस्ट जैसी ऊँची-ऊँची पर्वतें फतेह कर रही हैं। ऐसे साहस भरे कार्यों की लंबी सूची है। संतोष यादव से लेकर शिवांगी पाठक तक पहाड़ पर चढ़ने, खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन के साथ ही वे तीनों सेनाओं में बड़ी संख्या में भागीदारी भी कर रही हैं। अर्द्धसैनिक बलों में तो प्रभावी भूमिका में हैं। हरियाणा के सोनीपत जिले के सेक्टर 12 निवासी सौम्या इसकी बेमिसाल मिसाल हैं।



सौम्या को बीएसएफ में हरियाणा की पहली और देश की तीसरी महिला असिस्टेंट कमांडेंट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। बचपन से ही फौज में जाने की आकांक्षी इस लाडली ने वर्ष 2016 में मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बीटेक और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी थी। वह पहले ही प्रयास में यह सफल हुईं और ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में प्रशिक्षण के लिए गईं। बीते बुधवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में सौम्या को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से भी सम्मानित किया गया।