बस्तर संभाग

छत्तीसगढ़

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बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नवनिर्वाचित मुख्यमन्त्री भूपेश बघेल के दंतेवाड़ा आगमन पर महार समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पुष्प माला पहनाकर सौजन्य भेंट के साथ स्वागत किया। इस दौरान जाति समस्या के निराकरण के लिए महार समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमन्त्री को ज्ञापन सौंपा।

 

बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी ने समाज के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कराई, जहां समाज के प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में समाज को हो रही जाति की समस्या से अवगत कराते हुए निराकरण कराने की मांग की है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़-तेलंगाना-आंध्रप्रदेश के सीमांत गांवों को मिलाकर बीजापुर जिले में 20 हजार से ज्यादा महार समाज के नागरिक रहते हैं, जो दो दशकों से जाति प्रमाणपत्र नही बनने से परेशान हैं। प्रतिनिधिमंडल में राजेंद्र दुर्गम, डी इस राम, डी नागेश्वर, पवन दुर्गम, पुरुषोत्तम सल्लुर, चंद्रभान  झाड़ी, देवेंद्र चापडी सहित समाज के लोग मौजूद रहे।

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रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में पत्रकारिता के बड़े नाम रहे दिवंगत किरीट दोशी की धर्मपत्नी श्रीमती भद्रा दोशी (80 वर्ष) का आज उनके पैतृक स्थान, गुजरात के महुवा शहर में निधन हो गया।

उनके तीनों बच्चे भूजीत, वन्या और हिमांशु उनके पास ही थे। गौरतलब है कि किरीट दोशी पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी मशहूर थे। उन्‍होंने बस्‍तर क्षेत्र की अच्‍छी समझ थी। वे राष्‍ट्रीय स्‍तर के समाचार संगठनों से जुड़े रहे। उनके निधन के बाद उनकी धर्मपत्‍नी बच्‍चों के साथ ही थी और आज 80 वर्ष की आयु में उनकी निधन हो गया।

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मीडिया से बातचीत करते सीपीआई नेता मनीष कुंजाम मीडिया से बातचीत करते सीपीआई नेता मनीष कुंजाम

 

जगदलपुर। कोंटा के पूर्व विधायक व सीपीआई नेता मनीष कुंजाम ने मंत्री कवासी लखमा पर सीपीआई के जनपद सदस्य रहे कलमू ध्रुवा की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। मनीष कुंजाम ने कहा कि लखमा के ईशारे पर उनके समर्थकों ने कलमू की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी और इसे नक्सली वारदात बता दिया गया। जबकि नक्सलियो ने कलमू की हत्या से जुड़ा कोई भी पर्चा या प्रेस नोट जारी नही किया।

 कुंजाम ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीते 7 नवबंर को प्रचार के दौरान एक गांव मे कलमू की हत्या कर दी गई थी। कलमू की हत्या की साजिश कवासी लखमा द्वारा रची गई थी और उनके सर्मथकों ने उनके ईशारे पर कलमू की हत्या कर दी थी और इसे नक्सली वारदता बता दिया गया था। उन्होंने कहा कि प्राय:  नक्सली अपने द्वारा किये गये वारदात को अंजाम देने के बाद पर्चे और प्रेस नोट जारी करते हैं, लेकिन कलमू की हत्या से जुड़ी कोई भी जानकारी नक्सलियों ने नही दी।

 

इसके अलावा कुंजाम ने राज्य सरकार द्वारा झीरम कांड जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस घटना के मुख्य साक्ष्य कवासी लखमा है, जो अजीत जोगी के काफी खास-माने जाते हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी द्वारा उन्हे मंत्री बनाकर इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने की बात एक नाटक मात्र है। वहीं कांग्रेस सरकार द्वारा टाटा भू-प्रभावित किसानों को जमीन वापस दिलाने के मामले पर मनीष कुंजाम ने तंज कसते हुए कहा कि 2013 भूमि अधिग्रहण कानून नियम के मुताबिक 5 साल तक भूमि अधिग्रहण के बावजुद प्लांट नही लगने से किसानों को जमीन वैसे भी वापस हो जाती है।

ऐसे मे कांग्रेस सरकार राजनीति फायदा उठाने और अपने आप को आदिवासी हितैषी बताने के लिए जमीन वापसी का खेल खेल रही है। अगर कांग्रेस सरकार वाकई मे आदिवासियो की हितैषी है, तो जो हजारों एकड जमीन राज्य सरकार द्वारा अपने लैंड बैंक मे अधिग्रहित कर रखी गयी है उसे कांग्रेस आदिवासी किसानों को वापस करें।

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