वीमेन वर्ल्ड

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नई दिल्ली। आज की महिला पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं है। आज के दौर में वो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। लेकिन एक सवाल जो एक अरसे से सवाल बना हुआ है कि महिलाओं और पुरुषों में किसका दिमाग अधिक सक्रिय होता है। इस पहेली को सुलझा लिया गया है। इस सवाल का जवाब तलाशने का दावा किया है, अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने। दरअसल 20 से 82 साल की उम्र के 205 लोगों पर हुए शोध के आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया कि महिलाओं का दिमाग उनके हम उम्र पुरुषों की तुलना में ज्यादा सक्रिय होता है और उनकी याददाश्त बेहतर होती है।

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों के मस्तिष्क की गतिविधियों को देखा। इसमें दिखा कि महिलाओं का मस्तिष्क उसके हम उम्र पुरुष की तुलना में अधिक जवान था। शोधकर्ताओं के मुताबिक मस्तिष्क के जवान दिखने का मतलब अच्छी याददाश्त, सोचने-समझने की बेहतर शक्ति और ज्यादा सक्रिय दिमाग कहा जा सकता है। कई लोगों में दिमागी उम्र का अंतर तीन साल से भी अधिक था।

दिमाग को सुचारू रूप से काम करने के लिए ग्लूकोज व ऑक्सीजन की जरूरत होती है और मेटाबॉलिज्म का मतलब होता है कि किसी व्यक्ति का दिमाग इन दोनों तत्वों का कितना इस्तेमाल कर रहा है। शोध के मुताबिक महिलाओं का मेटाबॉलिज्म पुरुषों से बेहतर होता है और उनके दिमाग में ग्लूकोज का इस्तेमाल और रक्त प्रवाह ज्यादा बेहतर तरीके से होता है, इसीलिए उनका दिमाग पुरुषों के ज्यादा स्वस्थ व सक्रिय होता है।

वैज्ञानिक बढ़ती उम्र के साथ इंसान के मेटाबॉलिज्म में बदलाव के बारे में जानना चाहते थे। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मनु गोयल के मुताबिक, शोध में शामिल लोगों को नींद की दवा देकर पोजीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी मशीन के स्कैनर के अंदर तीन घंटे तक सुलाया गया। इस मशीन का इस्तेमाल मेटाबॉलिस्टम को नापने के लिए किया जाता है। स्कैन के बाद मिले डाटा का एक कंप्यूटर के जरिये अध्ययन किया गया।

ग्लूकोज और ऑक्सीजन की मदद से इंसान का दिमाग सुचारू रूप से काम करता है। सांस लेने पर ऑक्सीजन शरीर के अंदर पहुंचकर रक्त के जरिये दिमाग तक पहुंचता है। ग्लूकोज खाने-पीने की चीजों से बनता है और खून में घुलकर शरीर के बाकी हिस्सों में और इसकी 25 फीसद मात्रा दिमाग में जाती है।

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  1. नई दिल्‍ली । किसी ने सही कहा है, "सेहत ही इंसान की सबसे बड़ी संपत्ति है।" किसी भी मनुष्य के लिए लम्बे समय तक जीवित रहने के लिए स्वस्‍थ रहना बहुत जरुरी होता है। भागदौड़ भरी दिनचर्या में हम अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाह हो जाते है जो हमारे लिए नुकसानदायक हो सकता है। दिन भर में कुछ वक़्त अपने लिए निकाल कर अपने शरीर मन का ख्याल अवश्य रखना चाहिए खाशकर कामकाजी महिलाओं को।

    आइये जानते है महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य सम्बन्धी सावधानियों और उपायों के बारे में कि उन्हें क्या करना चाहिये और क्या नही

    1 अपने खान पान पर ध्यान दें –

ज्यादातर महिलाएं काम काज के चक्कर में अपने खाने पर ध्यान नहीं देती हैं , अगर आपको पूरे घर का ध्यान रखना हो तो पहले खुद का ध्यान रखना होंगा इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ का पूरा ध्यान रखना होगा. फ़ास्ट फ़ूड को ना कहना सीखें वरना अत्यधिक चर्बी बढ़ने लगेगी और मोटापे से संबंधति बिमारिओं का घर बन जायेगा आपका शरीर. अपने खाने में सब्जी भाजी अवश्य शामिल करें.

  1. व्यायाम करते रहें –

कई महिलाओ का मानना होता है कि वे दिन भर घर के कामकाज करती रहती हैं जिससे उनका व्यायाम हो जाता है. किन्तु ऐसा नही है. उन्हें ज्यादा से ज्यादा व्यायाम करने की जरुरत होती है. यदि महिलायें हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार भी व्यायाम करे तो वे ह्रदय विकार, शुगर, कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बच सकती है. व्यायाम करते रहने से आपका व्यक्तित्व भी निखरेगा और साथ ही आपका स्वास्थ भी अच्छा रहेगा.

  1. अपने तनाव को नष्ट करें –

यह सबसे बड़ी समस्या है जो ज्यादातर महिलाओं में दिखाई देती और यह इस वजह से कई बीमारियाँ भी होती हैं. उनके पास करने के लिए बहुत से काम होते है और वे उन सभी को एक साथ करना चाहती है. इससे आपको शुगर, ह्रदय रोग जैसी भयंकर बीमारियां भी हो सकती है. इसीलिये अपने आप को ज्यादा तनाव में न रखें और तनाव से दूर रहने की कोशिश करें.

4 . ज्यादा नींद लें  –

नींद महिलाओं के लिये बहुत जरुरी है. यदि आपकी इच्छा पलंग से उठने की नहीं होती या आपको थकावट महसूस होती है तो आपको पर्याप्त नींद लेनी चाहिये. क्योकि पर्याप्त नींद लेने से आप ह्रदय संबंधी बीमारियों से और मानसिक बीमारियों से बच सकते हो. नींद के साथ साथ शरीर को आराम देना महत्वपूर्ण है.

  1. ज्यादा मात्रा में कैल्शियम ग्रहण न करें -

बहोत ज्यादा मात्रा में कैल्शियम की मात्रा ग्रहण करने से आपको किडनी स्टोन संबंधी बीमारिया और साथ ही ह्रदय विकार भी हो सकता है. यदि आपकी उम्र 40 से कम है, तो आपको हर दिन 1000 मिलीग्रम, और यदि 40 से उपर है तो 12 मिलीग्राम कैल्शियम की जरुरत आपको होगी. और ये आपको पोष्टिक पदार्थ दुध और बादाम से मिल सकते है.

  1. जनन क्षमता का विचार करें –

बहुत सी महिलाओं को 30 से 40 की उम्र में भी गर्भवती होने की कोई समस्या नही होती है, लेकिन 32 की उम्र से ही वे अपनी जनन क्षमता को खोना शुरू कर देती है. इसीलिये यदि आपको बच्चा चाहिये तो उम्र के अनुसार अपने डॉक्टर से सलाह ले.

  1. आनुवांशिक जांच का ध्यान रखें –

आजकल लोगो में कुछ बीमारियां आनुवांशिक भी होने लगी है जैसे शुगर, ह्रदय संबंधी बीमारी, कैंसर इत्यादि. इसीलिये अपने आनुवांशिक इतिहास को जानकार यदि कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से उस बारे में बात करनी चाहिये.

इन उपायों को अपनाने से आप स्वस्थ रह सकते हो. महिलाओ का स्वस्थ रहना बहुत जरुरी होता है क्योंकि महिला पर ही पूरा घर निर्भर होता है. ऊपर दिए गए उपाय को अपनाकर महिलायें स्वस्थ रह सकती हैं और महिलायें  यदि स्वस्थ रहेगी तभी वे परिवार का पालन पोषण स्वस्थ रूप से कर पाएंगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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बेमेतरा। दुनिया भर में महिलाएं पुरुषो से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। इसी कड़ी में ई-रिक्शा चलाकर पुरूषों का वर्चस्व तोड़ने में कामयाब रही हैं, बेमेतरा की मुनिया, निर्मला, मंजू एवं प्रेमीन। इनका सपना साकार करने में मुख्यमंत्री ई-रिक्शा सहायता योजना ने इनकी मदद की है।

संसाधनों के अभाव में भी खुद को स्थापित करने का जज्बा रखने वालों को अंततः सफलता मिलती ही है, चाहे मार्ग में कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं। इन महिलाओं ने इस कथन को सार्थक किया है। श्रम विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को 50 हजार रूपए तक अनुदान दिया जाता है। जरूरत है अपने अंदर छिपे हुनर को तराशकर उसे उपयोग में लाने की। बेमेतरा विकासखण्ड के ग्राम सिंघौरी में रहने वाली श्रीमती मुनिया साहू पर यह बात बिलकुल सटीक बैठती है। समाज की परम्पराओं और वर्जनाओं को तोड़कर तमाम नकारात्मक दायरों से बाहर आकर दोनों हाथों में ई-रिक्शा का हैण्डल थामे यात्रियों को लाने-ले जाने में उन्हीं की तरह निर्मला भी अपनी भूमिका निभा रही हैं, साथ ही परिवार के भरण-पोषण में अपने पति के साथ बराबर की सहभागी बन रही हैं। निर्मला वर्मा गुनरबोड़ में निवास करती है।

बेमेतरा के ग्राम सिंघौरी की मुनिया साहू पति स्व. जगदीश साहू मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करती थी। मुनिया ने बताया कि आज से 5-6 वर्ष पूर्व कैंसर ने उनके पति की जिंदगी छीन ली, ऐसे में उनके समक्ष दुखों का पहाड़ आ पड़ा। मुनिया ने हिम्मत से काम लेते हुए बच्चों के लालन-पालन हेतु ई-रिक्शा चलाना सीखा, आज वह प्रतिदिन 400 से 500 रूपए तक कमाई कर लेती है। उनके परिवार में तीन बच्चों के अलावा सास भी है। श्रम विभाग से ई-रिक्शा मिलने के बाद महिला हितग्राही का जीवन स्तर ऊँचा हुआ है और महिला सशक्तिगरण में बेमेतरा जिले में मिसाल है। जिसको देखकर बहुत सारी महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से ई-रिक्शा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनी है।

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