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By तनवीर आलम

जशपुरनगर। किसी भी मनुष्य की आदत जल्दी छूटती नहीं। चाहे आदत अच्छी हो या फिर बुरी। बुरी आदतें नुकसान देती हैं और अच्छी आदतें संस्कार के साथ जीवन में लाभदायक होती हैं। जशपुर जिले के कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने यातायात नियमों के पालन करने में ध्यान लगाने की बजाए उसे अपनी आदत बनाने की सलाह जशपुरवासियों को दी।

30वां राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा सप्ताह के समापन के अवसर पर उपस्थित स्कूली विद्यार्थियों, युवाओं, पुलिसकर्मियों और जशपुरवासियों को संबोधित करते हुए कलेक्‍टर ने कहा कि देशभर में जितनी दिव्यांगता सडक़ हादसों की वजह से हो रही हैं उतनी किसी बीमारी से नहीं होती। शासन-प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए टीकाकरण हो या फिर कोई भी योजनाओं के संचालन में करोड़ों, अरबों रुपए खर्च किया जा रहा है, बावजूद दिव्यांगता को रोक पाना एक बड़ी चुनौती हो गई है। क्योंकि दिव्यांगता बीमारी से कम और सडक़ हादसों से ज्यादा आ रही है।

उन्होंने कहा, यातायात के नियमों का पालन करना ही इसका बचाव है। इसलिए नियमों को पालन करने के बजाए उसे अपनी आदत बना लें। जो आदत एक बार बन गई वह छूटती नहीं है। आदत का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वह पुणे शहर के रहने वाले हैं और वहां यातायात के नियमों का पालन सख्ती से किया जाता है। यही वजह है कि वे जब भी अपनी कार में चलाने के लिए बैठते हैं तो बगैर सीट बेल्ट बांधे बिना गाड़ी नहीं चलाते। यह आदत ऐसी बन चुकी है कि वे जब भी कार में बैठते हैं तो सीट बेल्ट अवश्य बांधते हैं।

उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करने से सडक़ हादसों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। समापन समारोह में जिले के एसपी शंकर लाल बघेल, जिला पंचायत सीईओ कुलदीप शर्मा, जशपुर एसडीओपी आरएस परिहार, जिला शिक्षा अधिकारी बीआर ध्रुव, यातायात प्रभारी सौरभ चंद्राकर के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

परिवार में आ जाता है संकट: सीईओ शर्मा

समापन समारोह के दौरान जिला पंचायत सीईओ कुलदीप शर्मा ने कहा कि सडक़ पर वाहन चलाने वाले पुरूष किसी के भाई होते हैं, किसी के पिता और किसी के ऐसे पुत्र होते हैं, जिनके कंधो पर परिवार की आर्थिक जरूरत टिकी होती है। वे अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। वहीं यातायात नियमों की अनदेखी करते हुए बरती गई थोड़ी सी लापरवाही घातक सिद्ध होती है और लोगों की जान चली जाती है। इसके बाद परिवार भारी आर्थिक संकट से गुजरता है। गरीबी से लड़ते-लड़ते परिवार थोड़ा ऊपर उठता है और एक हादसे के बाद फिर से वहीं पहुंच जाते हैं।

बड़ी संख्या में हुई कार्रवाई

समापन समारोह में यातायात प्रभारी सौरभ चंद्राकर ने 4 फरवरी से 10 फरवरी तक चले 30वां राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा सप्ताह में की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि इस एक हफ्ते में 175 वाहनों के प्रदूषण की जांच, 241 बगैर नंबर प्लेट के वाहनों पर नंबर लिखवाया गया। वहीं 150 वाहन चालकों को ट्रैफिक कार्ड जारी किया गया।

एनसीसी, एनएसएस का रहा योगदान

सडक़ सुरक्षा सप्ताह के दौरान एनसीसी के 15 वालंटियर, स्काउट गाइड के 37 वालंटियर, कुल 52 वालंटियर का खास योगदान रहा। उन्होंने सडक़ के चौक-चौराहों में वाहन चालकों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक करने में अपनी खास भूमिका निभाई। 235 वाहन चालकों ने हेलमेट रैली निकालकर लोगों को यातायात निमयों के प्रति जागरूक किया। समापन समारोह में समाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही सडक़ सुरक्षा सप्ताह में योगदान देने वाले नागरिकों के साथ ही यातायात पुलिस के जवानों को सम्मानित किया गया।

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