छत्तीसगढ़

बस्तर संभाग

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रमेश गुप्ता

सुकमा l पुलिस विभाग के 27 पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया है l सुकमा एसपी ने थानों, डीआरजी, रक्षित केंद्र, नक्सल सेल में पदस्थ अधिकारियों का ट्रांसफर के आदेश दिए हैं l देखिये लिस्ट:-

  1. निरीक्षक विनोद एक्का का डीआरजी कुकानार से थाना प्रभारी कुकानार
  2. निरीक्षक संजय सिंह का थाना कुकानार से थाना प्रभारी पोलमपल्ली
  3. निरीक्षक रितेश यादव का थाना पोलमपल्ली से थाना प्रभारी चिंतलनार
  4. निरीक्षक संदीप चंद्राकर का रक्षित केंद्र सुकमा से थाना प्रभारी चिंतागुफा
  5. निरीक्षक नरेंद्र दुबे का थानागाजी राज से थाना प्रभारी फुलबगड़ी
  6. निरीक्षक शैलेंद्र नाग का थाना दोरनापाल से थाना प्रभारी केरलापाल
  7. उपनिरीक्षक रितेश ठाकुर का थाना कुकानार से थाना प्रभारी दोरनापाल
  8. उपनिरीक्षक सत्यवादी साहू का थाना सुकमा से थाना प्रभारी गोलापल्ली
  9. उपनिरीक्षक गौरव पांडे का नक्सल सेल से थाना प्रभारी गादीरास
  10. उपनिरीक्षक सिवानंद सिंह का थाना कोंटा से थाना प्रभारी किस्टाराम
  11. उपनिरीक्षक राकेश पटेल का थाना गादीरास से थाना पुष्पाल
  12. उपनिरीक्षक मनीष कांत का थाना गोलापल्ली से थाना कुकानार
  13. उपनिरीक्षक फिरोज खान का डीआरजी 1 से थाना सुकमा
  14. उपनिरीक्षक बृजलाल भारद्वाज का डीआरजी सुकमा से थाना केरला पाल के साथ डीआरजी प्रभारी केरलापाल
  15. उपनिरीक्षक नरेश रावटे का डीआरजी बुरकापाल से थाना दोरनापाल
  16. उपनिरीक्षक ललित चंद्रा का थाना पोलमपल्ली से थाना एर्राबोर
  17. उपनिरीक्षक आशीष राजपूत का डीआरजी किस्ताराम टू से थाना कोंटा
  18. उपनिरीक्षक उमाशंकर राठौर का डीआरजी चिंतागुफा टू से थाना गादीरास
  19. उपनिरीक्षक विक्रांत सुरेश सिंह का थाना चिंतागुफा से थाना फुलबगड़ी
  20. उपनिरीक्षक हर्ष कुमार धुरंधर का थाना मरई गुड़ा से थाना पोलमपल्ली
  21. उपनिरीक्षक सुभाष चौबे का थाना चिंतलनार से थाना पोलमपल्ली
  22. उपनिरीक्षक धर्मेंद्र वैष्णव का थाना पुष्पाल से थाना मरईगुड़ा
  23. उपनिरीक्षक त्रिलोक प्रधान का कुकानार से थाना चिंतागुफा
  24. उपनिरीक्षक गुनारा मोगरे का थाना फुलबगड़ी से थाना चिंतलनार
  25. उपनिरीक्षक निशार अहमद नियाजी का थाना दोरनापाल से थाना भेजी
  26. उपनिरीक्षक लखेश केवट का थाना प्रभारी चिंतागुफा से रक्षित केंद्र सुकमा
  27. उपनिरीक्षक मनोज कौशिक का थाना कुकानार से रक्षित केंद्र सुकमा

रायपुर

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रायपुर। प्रदेश के एकमात्र पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पत्रकारों ने रायपुर स्थित पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा है। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव हनी बग्गा ने भी इसका समर्थन किया है।

हनी बग्गा ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासन ने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व संघ के प्रचारक कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर रख कर छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता के एक मात्र संस्थान का राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करने का कार्य किया है।

उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के प्रथम पत्रकार व हिन्दी की प्रथम कहानी एक टोकरी भर मिट्टी के रचयिता पं. माधवराव सप्रे ही थे। इन्होंनें छत्तीसगढ के पेंड्रा से ‘छत्तीसगढ मित्र’ पत्रिका का प्रकाशन सन् 1900 में से आरंभ किया था। इसलिए माधव राव सप्रे के नाम पर या छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय समाचार पत्र के संपादक के पद पर पहुंचने वाले पहले संपादक नौ ओलंपिक खेलों और तीन एशियाई खेलों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार चंदू लाल चंद्राकर के नाम पर पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम रखा जाना चाहिए।

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रायपुर। आईसीएसई और सीबीएसई कोर्स वाले प्राइवेट स्कूलों में फीस वृद्धि का मामला गुरुवार को विधानसभा में जोर-शोर से उठा। विपक्ष के विधायकों ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का मुद्दा उठाया और कहा कि प्राइवेट स्कूल एक साल में 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ा देते हैं। इसके अलावा एक खास दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने की बाध्यता रहती है। पूरे मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह घिरते हुए नजर आए। हालांकि उन्होंने स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने नियामक आयोग बनाने की घोषणा फिर से दोहराई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राजधानी के कई स्कूलों में यूनिफार्म, किताबों और फीस वृद्धि को लेकर आंदोलन हुए थे। छत्तीसगढ़ विधानसभा में 18 जुलाई को प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठा। बेलतरा के भाजपा विधायक रजनीश कुमार सिंह ने स्कूल शिक्षा मंत्री से पूछा कि निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के शुल्क निर्धारण के क्या नियम हैं। निजी स्कूलों की शुल्क लेने की प्रक्रिया क्या है? इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बताया कि शाला प्रबंधन समिति की कमेटी होती है और कुछ पालक उस कमेटी में रहते हैं वे दोनों मिलकर एक साल में इनकी क्या फीस रहेगी तो उनके फीस का स्ट्रक्चर वे लोग तय करते हैं और तय करने के बाद पालक को बुलाते हैं, पालक से उसकी सहमति लेते हैं और सहमति लेने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को भेजते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी उसमें अपनी सहमति देता है, सबकी सहमति से चूंकि उस कमेटी में पालक भी रहते हैं और जो प्रबंधन समिति है वह भी रहता है तो सबकी सलाह से एक साल के लिये फीस का निर्धारण करते हैं और जब डीओ के पास भेजते हैं तो वहां से जब उसकी अनुमति होती है कि सालभर का हमारा यह फीस स्ट्रक्चर है, हमे प्रति छात्र इतनी फीस लेनी पड़ेगी।

आयोग बनने तक पुराना शुल्क यथावत रखा जाए

विधायक रजनीश सिंह ने फिर पूछा कि इसमें साफ-साफ शुल्क वृद्धि और अन्य विषयों के बारे में कहा गया है जिसका पालन निजी स्कूलों व्दारा नहीं हो रहा है। दूसरा विषय यह है कि 9वीं से 12वीं तक शुल्क निर्धारण के संबंध में कोई निर्देश नहीं हैं। इस प्रकार पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों व्दारा चाहे वह शुल्क हो चाहे वह कई प्रकार के पुस्तकालय शुल्क, स्पोर्टस शुल्क और जहां-जहां यह नहीं है वहां भी लिया जा रहा है

इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री टेकाम ने जवाब दिया कि शिक्षा के अधिकार के तहत जो भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय की जो गाईड लाइन है उसमें शिक्षा पहली से लेकर 8वीं तक कव्हर्ड है और उसके बाद 9वीं के बाद उसके कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं कि उसमें कितनी फीस दी जायेगी चूंकि प्राइवेट स्कूल बहुत ज्यादा फीस ले रहे हैं इसलिये फीस लेना विनियामक आयोग की आवश्यकता है और हमारी सरकार ने यह तय किया है कि हम फीस विनियामक आयोग बनायेंगे उसके लिए कमेटी का गठन प्रचलन में है।

किताब और ड्रेस एक ही दुकान से खरीदने पर

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रश्न पूछा कि बहुत सारी स्कूलों से शिकायतें आ रही हैं। एक तो निजी विद्यालयों ने फीस की राशि बढ़ा दी है। दूसरा, किसी दुकान को चिन्हांकित करके, एड्रेस को चिन्हांकित करके बताया जाता है आपको पुस्तकें यहीं से खरीदना है। इस प्रकार की कितनी शिकायतें प्राप्त हुई हैं और उन पर क्या कार्रवाई हुई हैं? 30 परसेंट से अधिक फीस की दर से जिन स्कूलों ने वसूली है, क्या इन्हें वापस कराएंगे। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह ने जवाब दिया कि सबकी चिंता है कि शिक्षा सस्ती और सुलभ हो। इसीलिए 13 अप्रैल 2012 को विभाग ने एक परिपत्र जारी किया है कि शिक्षा राज्य का एक महत्वपूर्ण विषय है और शासन की नीति है कि प्रदेश में शिक्षा को व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि सेवा के रूप में संचालित किया जाना चाहिए। इसके बाद विधानसभा में कुछ बातों को लेकर शोर-शराबा और हंगामा हो गया, जिससे चर्चा पूरी नहीं हो सकी।

 पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने पूछा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत कितने बच्चों का दाखिला हुआ, उन्हें स्कूलों को कितनी राशि का भुगतान किया गया। इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह ने कहा कि आरटीई के तहत 2016-17 में 64 हजार 962 सीटें थी, जिनमें 38 हजार 232 छात्रों ने प्रवेश लिया। 2017-18 में 84 हजार 204 सीटें थी, जिनमें 42 हजार 297 छात्रों ने दाखिला लिया। 2018-19 में 90 हजार 57 सीटें थी, जिनमें 45 हजार 347 छात्रों ने दाखिला लिया। क्रमशः 54 करोड़, 56 करोड़ और इस वर्ष 14 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

इसके प्रति प्रश्न पर अजीत जोगी ने कहा कि पहले मैं शिक्षा मंत्री को धन्यवाद देता हूं। आरटीई जो गरीब बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए बनाया गया कानून है। उसको क्रियान्वित करने के लिए मेरी जानकारी के अनुसार इन्होंने पिछले कुछ महीने में अपने विभाग में बड़ी कसावट लाई है। दूसरी बात यह है कि जो आठवीं कक्षा तक आरटीई लागू था, उसको इन्होंने निरंतर 9वीं कक्षा तक लागू करने का आदेश भी जारी किया है। मेरे प्रश्न करने के बाद किया है। उसके लिए भी आप धन्यवाद के पात्र हैं। उसको 12वीं तक कर दीजिएगा। पर कुछ प्रश्न इससे उद्भूत होते हैं। हर गरीब बच्चों के पालकों का सपना होता है कि मुझे अपना बचपन याद है। मैंने पिताजी से पूछा कि पूरे प्रदेश में सबसे अच्छा स्कूल कौन सा है तो उन्होंने राजकुमार कॉलेज रायपुर बताया था। जहां घुड़सवारी भी होती है तैराकी भी होती है तो मेरा सपना था कि काश मैं भी ऐसे स्कूल में पढ़ सकूं और नेहरू जी जैसी कैम्ब्रीज या आक्सफोर्ड कॉलेज में पढ़ सकूं। वही सपना सब गरीब बच्चों का उनके पालकों का है और मैंने अनवरत इसके लिए लोकसभा में 20 वर्ष संघर्ष किया। मेरे साथ बहुत से लोगों ने संघर्ष किया। तब यह कानून का रूप ले सका। इसलिए इस कानून को मूर्त रूप देना बहुत जरूरी है। मैरा दूसरा प्रश्न यह है कि जो आपने 2002 की सर्वे सूची, 2007 की नगरों में सर्वे सूची के अनुसार गरीबी रेखा तय की है। यह बिलकुल गलत है। आप जिसके पास भी गरीबी रेखा के नीचे का प्रमाण पत्र है, क्या उसको आरटीई में शामिल करेंगे। दूसरा 40 हजार लोग आवेदन करते हैं और उनमें से 15 हजार लोग सफल होते हैं तो ये प्रतिशत बहुत कम है। जितने आवेदन करें, सबको प्रवेश दिलाइये, जिससे हमारे गरीब बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ सकें।

इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि सबकी चिंता है और हमारे नेताजी की भी चिंता है कि अच्छे स्कूल में बच्चे पढ़ें और आरटीई के तहत हर मां-बाप का सपना होता है कि अच्छे स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला दें और इसमें जो हम लोग चयनित किये हैं कि पूरे राज्य में 67 स्कूल हैं और भारत सरकार से 159 करोड़ रुपए इस मद में मिलना था, लेकिन मिला केवल 49 करोड़ है। इसमें जो प्रवेश का कम प्रतिशत दिख रहा है उसका कारण यह है कि अंग्रेजी माध्यम की शालाओं में आरक्षित सीट के विरुद्ध वहां पर अधिक आवेदन आते हैं और चयनित शाला का हमारा जो नियम है कि 1 किलोमीटर के अंतर की शालाओं में प्रवेश दिया जाये। हर कोई चाहता है कि हमारा बच्चा अच्छी स्कूल में पढ़े, वहां उसकी संख्या कम होती है। सलिए वहां पर कम एप्लाई हो पाता है और दूसरा कारण स्कूल की दूरी का भी है। गरीबी रेखा की सूची भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 2002 की सूची है और शहरी क्षेत्र में 2007 की सूची है। इस पर अजीत जोगी ने कहा कि स्कूल बहाना ढूंढ रहे हैं कि किसी न किसी तरीके से प्रवेश न दें। अब उनको बहुत बड़ा बहाना मिल गया है कि जो देय राशि है, उनको उसका भुगतान नहीं हो रहा है। निजी स्कूलों की एक गंभीर शिकायत आ रही है, वे पहली कक्षा में दर्ज संख्या कम दिखाते हैं। निजी स्कूलों में फर्जीवाड़ा चल रहा है। उसे रोकने परीक्षण कराएंगे क्या।

इस पर कई विधायकों ने और प्रश्न किये। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने स्कूल शिक्षा मंत्री से कहा कि आपने सभी के प्रश्न सुन लिये हैं, इनकी समीक्षा कीजिएगा।

जशपुर

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वाहिद खान

मनोरा। ड्यूटी में लापरवाही करने वाले 2 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर ध्रुव ने स्कूल से गायब होकर हाजिरी लगाने वाले 2 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है।

यह मामला शासकीय प्राथमिक शाला मनोरा का है, जहाँ दो शिक्षक विनेश्वर राम ओहदार और बालेश्वर राम भगत ने स्कूल खुलने के बाद मात्र एक दिन उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिसके बाद से वे स्कूल नहीं पहुंचे, जिससे स्कूल के 40 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा तीन शिक्षकों के कंधों पर आ गया था।

जिसके बाद दोनों शिक्षकों ने स्कूल में 28 जून से 16 जुलाई तक बिना किसी पूर्व सूचना और अवकाश स्वीकृति कराए बिना स्कूल से अनुपस्थित रहते हुए उपस्थिति पंजी में प्रश्नवाचक चिन्ह के ऊपर पांच अलग-अलग तिथियों पर उपस्थिति दर्शाकर हस्ताक्षर किया था।  जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया सही पाया गया, जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी बीआर ध्रुव ने कार्रवाई करते हुए दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

रायपुर

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रायपुर।  प्रदेश में मध्यान्ह भोजन में अंडे के वितरण को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसे लेकर विपक्ष भी सरकार पर जमकर निशाना साध रहा है। इसी कड़ी में भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार की चुटकी लेते हुए कहा कि- सावन के महीने में सरकार द्वारा स्कूल में बच्चों को अंडा बांटने से भगवान नाराज हो गए हैं, इसलिए ही प्रदेश में बारिश नहीं हो रही।

दरअसल छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के दौरान शुक्रवार को फिर से राज्य के स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार के साथ अंडा देने की बात को लेकर चर्चा छिड़ी। सरकार ने स्कूलों में हफ्ते में तीन दिन बच्चों को अंडे देने का प्रस्ताव तैयार किया था।

सरकार ने इसके बाद स्पष्ट किया कि जो बच्चे अंडा नहीं खाना चाहते उन्हें उसके बदले पूरक पोषक आहार दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पर विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, सावन के महीने में सरकार द्वारा स्कूल में बच्चों को अंडा बांटने से भगवान नाराज हो गए हैं, इसलिए ही प्रदेश में बारिश नहीं हो रही। बृजमोहन की इस टिप्पणी के साथ ही सदन में ठहाके गूंज उठे। इसके बाद कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानूसन विलंब से आया।

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