झारखंड

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पुलवामा हमले में शहीद हुए गुमला के विजय सोरेंग 


रांची। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले झारखंड के गुमला निवासी विजय सोरेंग शहीद हुए हैं ।  झारखण्ड सरकार ने 10 लाख रूपये व् परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है ।

बता दें कि यह एलान सीएम रघुवर दास ने शुक्रवार को ट्वीट कर किया है। सीएम ने विजय सोरेंग को श्रध्‍दांजली दी और कहा कि आतंकियों के इस कायराना हमले का देश करारा जवाब देगा। दुख की इस घड़ी में हम सभी शहीद विजय के परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेने का फैसला कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान की कमर तोड़ने की पहल कर दी है। पाकिस्तान और आतंकियों को ये याद रखना चाहिए कि अपने जवानों की शहादत का बदला हम ज़रूर लेंगे, हर हाल में लेंगे।

जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हुए थे। इसमें झारखंड के गुमला निवासी हेड कांस्टेबल विजय सोरेंग के भी शहीद होने की सूचना मिली थी। विजय सीआरपीएफ के 82वीं बटालियन में तैनात थे।

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- घायल नक्सली को CRPF जवान ने दिया खून

 

- घायल नक्सली को छोड़ भाग निकले थे साथी, जवानों ने पहुंचाया हॉस्पिटल

 

- सीआरपीफ की कोबरा बटालियन के साथ हुई थी नक्सलियों की मुठभेड़

 

रांची नक्सलियों और सुरक्षा बल के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली बुरी तरह से घायल हो गया था, और उसकी जान बचाने के लिए क्ल्हूँ की आवश्यकता थी। खून के आभाव में नक्सली की जान भी जा सकती थी तभी सीआरपीएफ के एक जवान ने घायल पड़े एक नक्सली को खून देकर उसकी जान बचाई है। सीआरपीएफ की 133वीं बटालियन के कॉन्स्टेबल राजकमल ने रांची के RIMS हॉस्पिटल में भर्ती एक नक्सली को खून डोनेट किया। सोचने वाली बात यह है कि घायल पड़ा नक्सली कुछ देर पहले सुरक्षाबलों पर ही गोलियां बरसा रहा था।

यह घटना झारखंड की है। दरअसल झारखंड के नक्सल प्रभावित खूंटी के जंगलों में 29 जनवरी को सीआरपीएफ की 209-कोबरा बटालियन और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में एक नक्सली घायल हो गया, जिसके साथी उसे छोड़कर भाग निकले थे। सीआरपीएफ के जवानों ने उसे उपचार के लिए रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया।

जख्मी हालत में हॉस्पिटल में भर्ती नक्सली को खून की जरूरत हुई, ऐसे में भी सीआरपीएफ का ही जवान सामने आया। सीआरपीएफ के कॉन्स्टेबल राजकमल अपने दुश्मन नक्सली की जान बचाने के लिए रक्तदान करने के लिए तैयार हो गए। नक्सली की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

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