मध्य प्रदेश

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रायपुर। कड़कनाथ मुर्गे को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच ठन गई है। दोनों राज्य कड़कनाथ मुर्गे के जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) को लेकर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं। चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय में दोनों राज्यों ने काले पंख वाले कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति पर जीआई टैग लेने के लिए आवेदन दिए हैं।

असल में जीआई टैग उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और विशेषताओं को पहचान देता है। विशेषज्ञों द्वारा यह टैग कृषि, प्राकृतिक और निर्माण किए जाने वाले सांस्कृतिक उत्पादों को दिया जाता है।

एक ओर मध्य प्रदेश ने दावा किया है कि कड़कनाथ मुर्गे की उत्पत्ति झाबुआ में हुई है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ का दावा है कि कड़कनाथ दंतेवाडा में अनोखे तरीके से पाला जाता है। यहां उसका संरक्षण व प्राकृतिक प्रजनन भी होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कड़कनाथ मुर्गे के मांस में 25-27% प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में 16-17% ही प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा  कड़कनाथ में करीब 1 % चर्बी होती है, जबकि अन्य में 5-6 % चर्बी रहती है।

मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग का कहना है कि  झाबुआ में आदिवासी कड़कनाथ मुर्गों का प्रजनन करते हैं। झाबुआ के ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने इन आदिवासी परिवारों की ओर से 2012 में कड़कनाथ के लिए जीआई टैग का आवेदन किया है।

वहीं छत्तीसगढ़ ने भी हाल ही में कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे के जीआई टैग के लिए दावा किया है। दंतेवाड़ा में 170 से अधिक कुक्कुट फार्म राज्य सरकार द्वारा समर्थित स्व-सहायता समूहों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इनमें सालाना 4 लाख कड़कनाथ मुर्गों का उत्पादन होता है। इसके अलावा कांकेर जिले में भी कड़कनाथ मुर्गे को बड़े स्तर पर पाला जाता है।

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