टेक्नोलॉजी

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नई दिल्ली। सोशल साइट्स अब हमारी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा बन चुका है ऐसे में थोड़े ही समय के लिए इससे दूर होने पर लोग परेशान हो उठते है। ऐसा ही हुआ जब व्हाट्सएप पर बुधवार को आई दिक्कतों ने आपको परेशान कर दिया था।

वर्तमान में भारत में व्हाट्सएप यूज़र्स की संख्या 300 मिलियन के पार जा चुकी है। बुधवार को तकनीकी कारणों से पूरे विश्व में व्हाट्सएप समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सर्वर डाउन हो गया था। भारत में भी व्हाट्सएप में दिक्कतें आयीं थीं। लोग इसे लेकर हलकान हो गए थे। तमाम तरह के फेक मेसेजेस भी खूब फॉरवर्ड किये जा रहे थे।

इसी बीच एक मेसेज भी खूब फॉरवर्ड हो रहा था। उस मेसेज में ये कहा गया था कि सेंट्रल गवर्नमेंट पीएम मोदी ने यह सन्देश दिया है कि व्हाट्सएप मैसेंजर रोज रात्रि 11:30 से सुबह 6:00 बजे तक बंद रहेगा, अगर आपको इस समस्या से बचना है तो आपको यह मैसेज आपके सभी कांटेक्ट लिस्ट में भेजना होगा। अगर आप इस संदेश को अपने सभी कांटेक्ट में नहीं भेजते हो तो आपका व्हाट्सएप अवैध हो जाएगा और आगे के 48 घंटों के अंदर आपका व्हाट्सएप अकाउंट हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। साथ ही मेसेज में आगे ये भी कहा गया कि आपको दोबारा से इसे चालू करने के लिए ₹499 का चार्ज हर महीने देना होगा। इस समस्या से बचने के लिए कम से कम 50 लोगों को यह मैसेज भेजना होगा अगर इसमें से 10 लोग भी रिसीव करते हैं तो आपका व्हाट्सएप लोगो ब्लू कलर का हो जाएगा। आपको इसे एक्टिव रखने के लिए 8 लोगों को भेजना होगा अगर नहीं करते हैं तो आपका व्हाट्सएप शनिवार से बंद हो जाएगा और इसे फिर से चालू करने के लिए आपको हर महीने 499 रुपये देना होगा।

सोशल मीडिया के ज़माने में हर चीज़ बहुत जल्दी वायरल हो जाती है। ये मेसेज भी उन्हीं में से एक है। आपको बता दें कि सरकार ने ऐसी कोई सूचना नहीं दी है। ये महज़ एक अफवाह है। भारत में व्हाट्सएप वैसा ही चलेगा जैसा चलता आया है।

दुनिया
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बीजिंग 5जी नेटवर्क की तेज रफ्तार ने एक ऐसे व्यक्ति की जान बचाई जो लम्बे समय से पित्ताशय कि पीड़ा से लम्बे दिनों से गुजर रहा था। चीन के अस्पताल में 5 जी नेटवर्क के जरिए एक व्यक्ति पित्ताशय का सफलता से ऑपरेशन किया गया उत्तरीय चीन के होबेई प्रांत में 200 कि.मी. दूर बैठे डाक्टरों कि टीम को लाइव जोड़ कर ऑपरेशन को किया। इस दौरान पूरी व्यवस्था को 5 जी नेटवर्क से जोड़ा गया था डॉक्टर के निर्देश में इस ऑपरेशन को लाइव जोड़ कर एक घंटे में पूरा किया गया। ऑपरेशन को ताहे हॉस्पिटल की शेनोंगजिया स्थित शाखा में अंजाम दिया गया।  

शेनोंगजिया से लाइव फीड शियान शहर स्थित ब्रांच में बैठे विशेषज्ञों के पास भेजा जा रहा था। 5जी टेक्नोलॉजी की तेज गति के कारण दोनों तरफ के चिकित्सक एक-दूसरे से बिना बाधा के संपर्क में बने रह सके। चाइना मोबाइल के अधिकारी गुई कनपेंग ने कहा, ‘5जी टेक्नोलॉजी में बिना अटके फोटो और वीडियो का आदान-प्रदान सुनिश्चित होता है। इसकी मदद से किसी जटिल ऑपरेशन की स्थिति में दूर-दूर बैठे हुए कई डॉक्टर साथ मिलकर अपनी विशेषज्ञता का प्रयोग कर सकते हैं।

चीन 5जी नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा

 

परिवहन, मनोरंजन और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सेक्टरों में बढ़ती मांग को देखते हुए चीन 5जी नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में प्रयासरत है। हुबेई प्रांत में 300 से ज्यादा 5जी बेस स्टेशन बनाए गए हैं, जिनकी मदद से यहां के लगभग सभी शहर पूरी तरह 5जी कवरेज से लैस हो गए हैं। चीन की राजधानी बीजिंग में 5जी के 4,300 बेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। 5जी नेटवर्क में डाउनलोड की स्पीड 4जी की तुलना में 10 से 100 गुना तक ज्यादा रहती है।

टेक्नोलॉजी
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धीरज शिवहरे

कोरिया l सोशल मीडिया से जहां लोगों का काम आसान हुआ है वहीं इससे कई नुकसान भी हो रहे हैं l आजकल ऑनलाइन हैकिंग के कई मामले सामने आ रहे हैं l ऐसी ही एक घटना हुई कोरिया जिले के एक युवक के साथ, जहां वाट्सएप कॉलिंग के माध्यम से फोन हैक कर लिया गया l  

दरअसल जिला मुख्यालय बैकुंठपुर निवासी सौरभ सिंह ने बताया कि उसके फोन में वाट्सअप कॉलिंग पर कौन बनेगा करोड़पति के नाम से कॉल आया और उसके ठीक बाद युवक ने गलती से मोबाइल पर आए कोड को कंपनी को ट्रांसफर कर दिया, जिसके बाद उसका फोन हैक हो गयाl युवक ने बताया कि कोड बताने के बाद उसका वाट्सएप बंद हो गया और अलग-अलग राज्यों पर उसके वाट्स एप नम्बर से केबीसी लॉटरी विनर के नाम पर दूसरों को वाट्सएप कॉल किया जा रहा है इस बात का पता चला युवक को तब चला जब उसे पंजाब से फोन कॉल आया और उसने कहा कि आपके नम्बर से मेरे वाट्सअप पर मैसेज आया है कि- ‘आप केबीसी में 25 लाख की राशि जीत चुके हैंl’ जिसके बाद आनन-फानन में पीड़ित युवक ने इसकी शिकायत थाने में करना व अपना  मोबाइल नम्बर कराना ही उचित समझाl

टेक्नोलॉजी
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पालमपुर  बड़ते हुए वायु प्रदूषण को रोकने के लिए के  हिमालय के जैवसंपदा प्रद्योगिकी संसथान ने  बायोडीजल बनाने की तैयारी की  है। इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआइआर) के पालमपुर स्थित हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने विशेष परियोजना के तहत फसलों के अवशेषों से बायोडीजल तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। हालांकि, शुरुआती दौर में इसकी लागत अधिक है, लेकिन विशेषज्ञ इसे कम करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, 'बायोडीजल बनाने में संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी लागत को किस प्रकार कम किया जाए, यह चुनौती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ही इस प्रोजेक्ट को लिया है। किसानों से कच्ची सामग्री लेकर उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

फसलों के अवशेषों से बनता है बायोडीजल

मक्का, धान, गेहूं और गन्न फसलों के अवशेषों को बारीक बनाकर पाउडर में परिवर्तित किया जाता है और इसमें 5 हाइड्रोक्सी मेथिल फुरफुराल (5-एचएमएफ) यानी कार्बनिक मिश्रण मिलाया जाता है। इससे ही बायोडीजल तैयार किया जाता है।

मध्य प्रदेश
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जबलपुर। लोकसभा चुनाव के लिए लाई गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में खराबी पाई गई है। प्राथमिक जांच में 1751 ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में गड़बड़ी पाई गई है। ईवीएम की गड़बड़ी जांच करने इनकी निर्माता कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड को वापस बेंगलुरू भेजा जा रहा है। चुनाव अधिकारियों की टीम मशीनों को लेकर बेंगलुरू लेकर रवाना होगी।

दरअसल शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में फस्ट लेवलकिंग में तकनीकी खराबी मिली है। आम चुनाव से पहले ईवीएम मशीन में बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। इन मशीनों की जब प्राथमिक जांच की गई तो इसमें गड़बड़ी मिली है। खराब मशीनों की संख्या तकरीबन 1700 से ज्यादा है। जबलपुर और शहडोल संभाग के जिलों की ईवीएम की बेलट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट में टेक्नीकल खामियां मिलने के बाद इन्हें जबलपुर के मएलबी स्कूल से बेंगलुरू वापस भेज दिया गया है।

बता दें कि ये मशीनें जबलपुर संभाग के जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिले में मतदान के लिए संभाग मुख्यालय लायी गई थी। शहडोल संभाग के शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिले की ईवीएम मशीनों में खामियां मिली हैं। इनमें 113 बेलट यूनिट, 270 कंट्रोल यूनिट और 1332 वीवीपेट मशीनें भी शामिल हैं। इन्हें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बेंगलुरू को वापस करने की जिम्मेदारी अतिरिक्त तहसीलदार गोरखपुर दिलीप चौरसिया को दी गई है।

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