By रमेश गुप्ता

दुर्ग. जिले में गोबर के दिए और वंदन वार बनाने का काम होता है. अब छत्तीसगढ़ के गोबर के दिए और वंदन वार विदेशों में भी पहुंचने लगे हैं. भिलाई की महिलाओं द्वारा निर्मित गोबर से बनी सजावटी सामग्री को लंदन से भी ख़रीददार मिले हैं. उड़ान नई दिशा संस्था की निधि चन्द्राकर ने बताया कि हाल ही में उन्होंने लंदन भेजने के लिए दियों ,वंदनवार, वाल हैंगिंग की डिलीवरी दी है.

गोबर से बने दियों और सजावट के सामान का अब ग्रामीण अंचल में ही नहीं बल्कि शहरों में भी क्रेज़ है. नगरीय निकायों में भी महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और त्यौहार के लिए दिए बना रहे हैँ. इनमें मौसमी सब्ज़ियों और फूलों के बीज भी डाले गए हैं ताकि उपयोग के बाद इनको गमले में डालकर पौधे उगाए जा सकें. साधारण दियों कि कीमत 2 रुपये, डेकोरेटिव दियों का मूल्य 50 से 150 रुपए , वंदन वार 150 से 250 रुपए और शुभ लाभ और लटकन 100 रुपए में उपलब्ध है. करीब 250 महिलाएं मिलकर ये काम कर रही हैं.

जिले के धमधा जनपद के नंदौरी के संगवारी स्व सहायता समूह ने नई कहानी लिखी है. समिति की अध्यक्ष रानी लक्ष्मी बाई बंछोर ने बताया कि जब उन्होंने सरकार की नरवा गरूवा घुरूवा बाड़ी ,गोधन न्याय योजना के बारे सोशल मीडिया पर देखा और अखबारों में पढ़ा तो उनको भी रुचि उत्पन्न हुई कि वो भी घर पर बैठकर पैसे कमा सकती हैँ. योजना से प्रभावित होकर उन्होंने समूह बनाया और यू ट्यूब पर गोबर से दिए बनाने के तरीके देखे . उन्हें जनपद पंचायत से भी मदद मिली. उनका काम सबको पसंद आया और अब वो लोगों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं. राजनांदगांव के दूरस्थ मानपुर जनपद से भी महिलाएं प्रशिक्षण लेकर जा चुकी हैं. साथ ही पाटन के कई क्लस्टर की महिलाओं को भी इस समूह ने गोबर से दिए बनाना सिखाया है. ये दिए 30 से 35 रुपए दर्जन में उपलब्ध हैं.