किसानों ने लगाया आरोप छोटे किसानों को छला जा रहा है

भोपाल कर्जमाफी को लेकर किसानों में जहाँ भारी उत्साह देखने को मिल रहा था। वहीं अब खबर है कि किसानों की कर्जमाफी को लेकर नई समस्या उत्पन्न हो गयी है। जय किसान ऋण मुक्ति योजना के तहत किसान कर्जमाफी का फॉर्म तो भरने लगे हैं, लेकिन जो सूची सरकारी दफ्तरों में चिपकाई गयी है, उससे किसान परेशान नजर आ रहें हैं। किसी के नाम के आगे 30 रुपये की कर्जमाफी लिखी है तो किसी के सवा सौ रुपये।



उससे भी बड़ी समस्या किसानों के लिए ये है कि सरकारी बैंकों में है ये लिस्ट अंग्रेजी में आ रही है। निपानिया के शिवलाल, और शिवनारायण दोनों अपनी बैंक पासबुक के साथ सरकारी दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। दोनों पर 20000 से ज्यादा का कर्ज है लेकिन माफी मिली है 13 रुपये की। शिवपाल का कहना है, 'सरकार कर्जा माफ कर रही है तो मेरा पूरा माफ होना चाहिये, 13 रुपये, 5 रुपये इतने की तो हम बीड़ी पी जाते हैं।’ 

छोटे किसानों को छला जा रहा है

वहीं फॉर्म को भरने के बाद खरगौन के किसान भी हैरान हैं कुछ किसानों के नाम पर तो 25, 50, 150, 180 और 300 रुपये तक दर्ज हैं। किसान रतन लाल महाजन का कहना है कि उन्होंने 2 साल से कोई कर्ज नहीं लिया, फिर भी उनके नाम के आगे 180 रु. कर्जमाफी लिखा है। हमीद खान जो मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा से ही हैं, उनके ऊपर 10000 रुपये का कर्ज है लेकिन माफ हुए हैं मात्र 232 रुपये। हमीद खान उम्मीद जताते हुए कहते हैं, 'माफ होना चाहिये पूरा पैसा, बड़े किसानों का 2 लाख माफ हो रहा है, यहां तो छोटे किसानों के लिए बड़ी समस्या हैं।

वहीं आगर मालवा के नारायण सिंह ने एक लाख रुपये का कर्ज लिया था लेकिन उनका नाम 2 लाख रुपये के कर्ज वाली लिस्ट में है। वहीं परसुखेड़ी के भगवान सिंह के पास 4 बीघा ज़मीन है और उनके ऊपर 2,63,000 का कर्ज है लेकिन उनका नाम किसी भी लिस्ट में नहीं है।

बीजेपी ने साधा निशाना

अंग्रेजी में नाम आने की बात पर बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनके पास हिन्दी में सॉफ्टवेयर नहीं है। वहीं बीजेपी का कहना है सरकार किसानों को छलावा दे रही है, इसका परिणाम लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को भुगतना होगा।