नई दिल्ली। भारत की सबसे प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर पत्रकार और कार्यकर्ता अप्सरा रेड्डी को कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अप्सरा रेड्डी को ऑल इंडिया महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। वह ऐसी पहली ट्रांसजेंडर हैं जो महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव बनी हैं। अप्सरा की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन पढ़ाई में अच्छी होने के कारण उन्हें स्कॉलरशिप मिली जिससे वे ऑस्ट्रेलिया और लंदन में पढ़ी।

एक ट्रांसजेंडर महिला के रूप में अप्सरा अपने कॉलेज के दिनों में सामाजिक सक्रियता में शामिल रही थीं। बेहद मुश्किल परिस्थितियों से लड़ते हुए आज उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है और लोगों को सीख दी है कि चाहे लोग आपके बारे में कुछ भी कहें लेकिन अगर आप कुछ करने का ठान लेते हैं तो आपको कोई नहीं रोक सकता। अप्सरा रेड्डी अभी तक एआईएडीएमके के साथ जुड़ी हुई थीं। इससे पहले वह बीजेपी में भी रह चुकी हैं।

रेड्डी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पत्रिकाओं के साथ काम कर चुकी हैं। वह तमिलनाडु में स्वास्थ्य जागरुकता अभियान चलाने के साथ ही महिलाओं के मुद्दों पर भी मुखर रहती हैं। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद अप्सरा ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में देखा है कि ट्रांसजेंडर महिलाओं से कहा जाता है कि वह कुछ नहीं कर पाएंगी। ऐसे में उनके लिए भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी में शामिल होना भावुकता भरा क्षण है। अप्सरा रेड्डी मूल रूप से आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा चेन्नई में पूरी की।

उन्होंने ट्रांसजेंडर के अधिकारों के लिए काम किया और पत्राकारिता भी की। इसके बाद उन्होंने लंदन से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और वहां के मीडिया संस्थानों में भी काम किया। अप्सरा रेड्डी चाइल्ड रेप के हाई-प्रोफाइल मामलों को भी उठा चुकी हैं। उन्होंने तमिलनाडु में एक मीडिया सनसनी पैदा कर दी थी। सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय आवाज और पत्रकारिता में ब्रांड बनने के बाद वो अमित शाह से मिलकर भाजपा में शामिल हो गई थीं। पर एक महीने के भीतर ही उन्होंने पद छोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में स्वतंत्र विचारों वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता द्वारा अप्सरा को राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका दी गई। एआईडीएमके में आपस में मतभेद होने तक अप्सरा ने उस भूमिका को जारी रखा था। 

अप्सरा ने लड़के के तौर पर जन्म लिया था। बाद में उन्होंने अपना जेंडर चेंज करवा लिया। उनका कहना है पाखंड और भेदभाव ने ही मुझे अन्याय के खिलाफ काम करने के लिए प्रेरित किया है। भारत को ऐसी ताकतों द्वारा शासित किया जा रहा है जो महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की तुलना में धार्मिक पहचान पर अधिक महत्व देते हैं। कांग्रेस के बारे में उनका कहना है कि यह वास्तव में ऐसी पार्टी है जिसने भारत का निर्माण किया। राहुल गांधी का महिलाओं के प्रति निष्पक्ष प्रतिनिधित्व, महिला-केंद्रित घोषणापत्र और गतिशीलता के प्रति प्रतिबद्धता वास्तव में प्रेरणादायक है और मुझे उनके नेतृत्व में देशभर में महिलाओं की सेवा करने में खुशी होगी। 
 
उन्होंने कहा कि मानव विकास रिपोर्ट के लिंग असमानता सूचकांक के अनुसार 40% से अधिक भारतीय महिलाएं अपने पति या परिवार के सदस्यों के हाथों दुर्व्यवहार, उपेक्षा या हिंसा का शिकार होती हैं। बालिका दुष्कर्म एक सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। महिलाओं को अपराधों और दुर्व्यवहार से बचाने के लिए हमें उनकी आवाज को अपनाने की जरूरत है। ट्रांसजेंडर बिल के बारे में बात करते हुए अप्सरा कहती हैं, बीजेपी सरकार का हमारे प्रति यह संरक्षणवादी रवैया है। हमें दान की आवश्यकता नहीं है, हमें असमानता को दूर करने के लिए सहायता की आवश्यकता है।