राउरकेला। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लीची की गुणवत्ता की जांच करने का निर्देश दिया है। चमकी बुखार का मुख्य कारण लीची को माना जा रहा है। बिहार के मुजफ्फरपुर एवं आसपास के इलाके में चमकी बुखार से 134 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। लीची के कारण इस बुखार का वायरस बच्चों में फैलने की बात कही जा रही है निर्देश देने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।

 वायरस अप्रैल से जून महीने में अधिक सक्रिय

 आइजीएच के पूर्व संयुक्त निदेशक डा. आरबी महापात्र का कहना है कि चमकी बुखार एक्यूट एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम  (एईएस) जापानी वायरस, एंट्रो वायरस एवं हार्विस वायरस के कारण होता है जिसका संक्रमण एक-दूसरे पर मच्छरों से होता है। वायरस अप्रैल से जून महीने में अधिक सक्रिय होते हैं। इसका एक कारण लीची भी है। लीची में प्राकृतिक रूप से हाइपोग्लाइसिन ए पाया जाता है। हाइपोग्लाइसीमिया यानी रक्त ग्लूकोज को कम कर देता है। लीवर में ग्लूकोज कम होने की वजह से पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज रक्त के साथ मस्तिष्क में नहीं पहुंच पाता है जिससे रोगी की हालत खराब हो जाती है।

चमकी बुखार के लक्षण

रोगी को चमकी यानी मिर्गी जैसे झटके आना, बेहोशी आना, सिर में लगातार हल्का या तेज दर्द, अचानक बुखार आना, पूरे शरीर में दर्द होना, जी मिचलाना और उल्टी होना, बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस होना और नींद आना, दिमाग का ठीक से काम न करना और उल्टी-सीधी बातें करना, पीठ में तेज दर्द और कमजोरी, चलने में परेशानी होना या लकवा जैसे लक्षणों का प्रकट होना।

 ऐसे करें बचाव

राउरकेला सरकारी अस्पताल  के अधीक्षक डॉ. दीनबंधु पंडा ने बताया की बच्चों को रात में अच्छी तरह से खाना खिलाकर सुलाएं। खाना पौष्टिक होना चाहिए। बच्चों को खाली पेट लीची न खाने दें। अगर संभव हो तो ग्लूकोज पाउडर या चीनी को पानी में घोलकर देना चाहिए, ताकि रक्त में ग्लूकोज का मात्रा बढ़ सके और मस्तिष्क को प्रभावित होने से बचाया जा सके। लक्षण नजर आते ही बच्चे को अस्पताल ले जाना चाहिए।