नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े विमान ने कैलिफोर्निया में परीक्षण के लिए पहली बार उड़ान भरी। इसमें छह बोइंग 747 इंजन लगे हुए हैं। शनिवार को इस बड़े विमान ने अपनी पहली यात्रा मोजावे रेगिस्तान के ऊपर की। इस विमान का निर्माण अंतरिक्ष में रॉकेट ले जाने और उसे वहां छोड़ने के लिए किया गया है। दरअसल यह रॉकेट उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा तक पहुंचाने में मदद करेगा। 

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्‍थापक पॉल एलन के विशाल करिश्‍मे ने शनिवार 13 अप्रैल को पहली बार आसमान में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। दुनिया के सबसे विशाल विमान के बारे में जिसकी शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी। स्‍ट्रेटोलॉन्‍च सिस्‍टम के सीईओ जीन फ्लोयड ने इस कामयाबी पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि आखिर हमनें वो कर दिखाया जिसका काफी लंबे समय से इंतजार था। हालांकि इस खुशी में उन्‍हें पॉल एलन के न होने का दुख भी था।

इस प्रोजेक्‍ट को शुरू करने वाले पॉल  एलन का निधन 15 अक्‍टूबर 2018 को 65 वर्ष की आयु में हो गया था। इस विमान के टेस्‍ट पायलट इवान थॉमस (पूर्व फाइटर पायलट) थे। इस विमान ने 173 मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी और यह करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई तक गया। इसकी लैंडिंग भी बेहद खूबसूरत नहीं। करीब ढाई घंटे की फ्लाइट टेस्टिंग में  क्रू को कहीं कोई दिक्‍कत नहीं आई। विमान की इस सफलता से हर कोई खुश है।

आपको बता दें कि इस विमान को बनाने का मूल मकसद धरती से 35 हजार फीट की ऊंचाई पर सैटेलाइट ले जाकर स्पेस में लॉन्च करना है। इससे ईंधन का खर्च तो बचेगी ही, साथ ही सैटेलाइट या स्पेस मिशन को ज्यादा दूरी के लिए भी भेजा जा सकेगा। पॉल ऐलन ने इसे 'एयर लॉन्च' नाम दिया था। आपको बता दें कि पिछले वर्ष यह विमान दुनिया के सामने पहली बार आया था। उस वक्‍त इसके इंजन की टेस्टिंग की गई थी। इस विमान में 28 पहिए लगे हैं।

यह विमान दो हिस्‍सों में बंटा है। इस विमान का बीच वाला हिस्‍सा स्‍पेस मिशन के लिए रॉकेट लॉच करने के लिए इस्‍तेमाल लाया जा सकेगा। जहां तक इस विमान से सैटेलाइट लॉन्‍च करने की बात है तो इसके लिए कंपनी ने पहले से ही समझौता भी किया हुआ है। आपको बता दें कि अभी तक सैटेलाइट लॉन्‍च करने में काफी खर्च होता है, लेकिन इस विमान के जरिए उम्‍मीद की जा रही है कि इसके खर्च में कमी आएगी। कहा जा रहा है कि इससे सैटेलाइट लॉन्‍च का तरीका कम खर्चीला और तेज रफ्तार वाला होगा।