पालमपुर  बड़ते हुए वायु प्रदूषण को रोकने के लिए के  हिमालय के जैवसंपदा प्रद्योगिकी संसथान ने  बायोडीजल बनाने की तैयारी की  है। इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआइआर) के पालमपुर स्थित हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने विशेष परियोजना के तहत फसलों के अवशेषों से बायोडीजल तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। हालांकि, शुरुआती दौर में इसकी लागत अधिक है, लेकिन विशेषज्ञ इसे कम करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, 'बायोडीजल बनाने में संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी लागत को किस प्रकार कम किया जाए, यह चुनौती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ही इस प्रोजेक्ट को लिया है। किसानों से कच्ची सामग्री लेकर उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

फसलों के अवशेषों से बनता है बायोडीजल

मक्का, धान, गेहूं और गन्न फसलों के अवशेषों को बारीक बनाकर पाउडर में परिवर्तित किया जाता है और इसमें 5 हाइड्रोक्सी मेथिल फुरफुराल (5-एचएमएफ) यानी कार्बनिक मिश्रण मिलाया जाता है। इससे ही बायोडीजल तैयार किया जाता है।