अमित शाह ने किया खुलासा अफ्सपा पर विवाद के बाद छोड़ी थी जम्‍मू कश्‍मीर की  सरकार  

रायपुर । 
भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के सुंदरबनी में जनसभा को संबोधित किया। यहां उन्‍होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में  अफ्सपा या AFSPA के मुद्दे पर BJP ने अपनी सरकार गंवाई है, उन्होंने कहा कि हमें सरकार गंवाना मंजूर है लेकिन AFSPA से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। 


अब समझिए कि अफ्सपा पर हंगामा क्‍यों हो रहा है

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने के बाद AFSPA (अफ्सपा) को हटाने का वादा किया है।  अफ्सपा को साल 1958 में संसद ने पारित किया था। इसका पूरा नाम The Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 (AFSPA) है। 11 सितंबर, 1958 को अफ्सपा लागू हुआ था।

सुरक्षा बलों को क्या खास अधिकार मिलते हैं?
इस कानून ने सुरक्षा बलों को कई खास अधिकार दिए हैं। अगर कोई कानून के खिलाफ काम करता है तो एक सैनिक उस व्यक्ति पर गोली चला सकता है या शारीरिक बल का इस्तेमाल कर सकता है। जहां हथियार रखे गए हों, उन जगहों को सुरक्षा बल तबाह कर सकता है। वे आतंकियों के अड्डे और प्रशिक्षण शिविरों को भी तबाह कर सकते हैं। इसके अलावा किसी जगह के बारे में यह शक होने की वहां हथियार जमा करके रखा जा रहा है, वहां सैनिक घुसकर उस स्थान की तलाशी ले सकते हैं। वे संदिग्धों को गिरफ्तार भी कर सकते हैं और हथियारों को भी जब्त कर सकते हैं। अगर किसी ने संज्ञेय अपराध किया है तो सशस्त्र बल उसको किसी वॉरंट के बगैर गिरफ्तार कर सकता है। सुरक्षा बलों पर इसके लिए किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अफ्सपा के तहत किसी तरह की कार्रवाई करने पर सैनिकों के खिलाफ न मुकदमा चलाया जा सकता है और न किसी तरह की कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। 


अफ्सपा हटा तो ?
अब यदि ये कानून हटा लिया गया तो आतंकियों को मारने के बाद फोर्स के अफसर जवानों पर केस चलाया जा सकता है। इसी का विरोध भाजपा कर रही है। कांग्रेस के मुताबिक इसे हटाने की जरूरत इस वजह से ताकि इसका गलत इस्‍तेमाल न हो कई मानवाधिकार संगठन भी इसे हटाने की मांग लंबे वक्‍त से कर रहे हैं।